अलीगढ़ में चिकिस्तकों ने नोएडा-गाजियाबाद में मोबाइल गेम के चलते तीन सगी बहनों के सुसाइड की झकझोर देने वाली घटना के बाद मोबाइल पर रोक लगाने की मांग की है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत को ‘मेंटल हेल्थ इमरजेंसी’ करार दिया है। संस्था की केंद्रीय इकाई (CIAP) ने केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी है कि स्कूलों में मोबाइल के जरिए होमवर्क देने के सिस्टम पर तुरंत लगाम लगाई जाए। 14 साल के कम उम्र के बच्चों को रखें दूर IAP अध्यक्ष डॉ. प्रदीप बंसल ने कहा कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल आधारित होमवर्क देने पर प्रतिबंध लगना चाहिए। घरों में भी अभिभावक बच्चों के स्क्रीन टाइम को कड़ाई से मॉनिटर करें। वहीं, बच्चों को डिजिटल दुनिया से निकालकर खेल-कूद और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर देना जरूरी है। चालाया जाएगा जागरूकता अभियान बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि मोबाइल से होने वाले नुकसानों के प्रति अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। इस अभियान में वॉलंटियर को भी शामिल किया जाएगा, जिससे स्कूलों में जाकर भी डिजिटल होमवर्क पर रोक लगाने के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर होमवर्क कोरोना जैसी महामारी में एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसे नियमित करना बच्चों के लिहाज से कतई सही नहीं है। अलीगढ़ IAP को नेशनल अवार्ड अलीगढ़ शाखा को राष्ट्रीय स्तर पर देश की दूसरी सर्वश्रेष्ठ शाखा का सम्मान मिला है। जनवरी में कोलकाता में हुई सेंट्रल कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. विकास मेहरोत्रा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। यह सम्मान पिछले एक साल में किए गए सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों के लिए दिया गया है। 22 फरवरी को बच्चों की होगी निशुल्क जांच IAP के सचिव डॉ. अभिषेक शर्मा ने बताया कि 22 फरवरी को पन्ना लाल हॉस्पिटल में निशुल्क बाल चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा। कोषाध्यक्ष डॉ. नीलम मंधार ने शहरवासियों से अपील की है कि वे गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को इस कैंप में लाएं और विशेषज्ञों की राय लें। इस दौरान संरक्षक डॉ. वाईके द्विवेदी समेत कई वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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