बलिया में पॉक्सो एक्ट के एक मामले में न्यायालय ने अभियुक्त भीम राजभर को 12 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, लखनऊ द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के कारण आया है। बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, खेजुरी थाने में अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में अभियुक्त भीम राजभर (पुत्र तिलंगी राजभर, निवासी अजनेरा, थाना खेजुरी, जनपद बलिया) को दोषी ठहराया गया। न्यायालय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), कोर्ट संख्या 08 ने धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत उन्हें 12 वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड का भुगतान न करने पर अभियुक्त को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, धारा 363 भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। एक अन्य मामले में, धारा 363 के तहत दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को सात वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड का भुगतान न करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। घटना के संक्षिप्त विवरण के अनुसार, अभियुक्त ने वादी की नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा लिया था और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। इस संबंध में प्राप्त तहरीर के आधार पर खेजुरी थाने में मामला दर्ज किया गया था और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इस मामले में अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार पाण्डेय थे।
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