ललितपुर में एक दशक पुराने मारपीट के मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है। रोडवेज बस के चालक और परिचालक के साथ मारपीट करने के दोषी महेंद्र यादव को तीन साल कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह घटना 31 अगस्त 2016 को हुई थी। झांसी बस डिपो की लोहिया बस (नंबर यू.पी.93 ए.टी. 7160) बालाबेहट से झांसी जा रही थी। ग्राम बम्हौरीवंशा के पास कुछ लोगों ने बस को रोककर चालक और परिचालक के साथ मारपीट की थी। आरोप है कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस संबंध में बस डिपो के परिचालक अशोक कुमार, जो फतेहपुर के असोथर आकूपुर निवासी हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी तहरीर पर महेंद्र यादव, सोनू यादव और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। थाना बालाबेहट में दर्ज इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने वैज्ञानिक और तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण विवेचना पूरी कर अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इस मामले की लगातार प्रभावी पैरवी की गई। थाना बालाबेहट पुलिस, कोर्ट पैरोकार और अभियोजन पक्ष के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, 02 फरवरी 2026 को एडीजे/एससी-एसटी एक्ट न्यायालय ने महेंद्र यादव को दोषी करार दिया। न्यायालय ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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