जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में एक घायल मरीज के इलाज को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि आकस्मिक विभाग में एक घायल मरीज जमीन पर पड़ा हुआ था। जिससे मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि वीडियो तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। यह संस्थान की छवि धूमिल करने का प्रयास है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि वीडियो में दिख रहा मरीज उपेक्षित नहीं था और न ही उसे बिना इलाज के छोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि 3 फरवरी को सुबह करीब 11 बजे होमगार्डों द्वारा एक घायल मरीज को मेडिकल कॉलेज लाया गया था। होमगार्डों ने जानकारी दी थी कि आटा रेलवे स्टेशन के पास किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी है। प्राचार्य के अनुसार, मरीज के आकस्मिक विभाग में पहुंचते ही आवश्यक चिकित्सकीय जांच की गई। उसका सीटी स्कैन भी कराया गया। प्राथमिक इलाज के बाद मरीज को बेड पर लिटाया गया और इलाज की पूरी प्रक्रिया अपनाई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मरीज के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि आकस्मिक विभाग में अज्ञात मरीजों की उचित देखभाल नहीं की जाती, जबकि यह दावा पूरी तरह निराधार है।
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