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अमिताभ ठाकुर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर:संवैधानिक और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए

पूर्व आईपीएस अधिकारी और आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर से जुड़े संवैधानिक और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) औपचारिक रूप से दर्ज कर ली गई है। यह याचिका आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने 22 दिसंबर 2025 को दायर की थी। संगठन ने इस मामले को लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्हिसलब्लोअर संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9 और 10 दिसंबर 2025 को अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी अवैध थी, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। संगठन का दावा है कि हिरासत के दौरान उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई, जो मानवाधिकार मानकों के विपरीत है। याचिका में यह भी उल्लेख है कि हिरासत और जेल अवधि के दौरान उनकी निजता का हनन हुआ। उन पर अनावश्यक निगरानी रखी गई, जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हुई। जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि कोडीन युक्त कफ सिरप माफिया और उससे जुड़े कथित राजनीतिक संरक्षण के खुलासों के कारण अमिताभ ठाकुर की जान को खतरा है। संगठन का आरोप है कि इन खुलासों के चलते उनके विरुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की गई। आज़ाद अधिकार सेना का कहना है कि एक व्हिसलब्लोअर के रूप में उन्हें संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए था। इसके विपरीत, उन्हें डराने और सार्वजनिक जीवन से अलग करने के प्रयास किए गए। याचिका में मीडिया से संवाद के अधिकार पर कथित अवैध रोक और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध का भी उल्लेख है। संगठन के अनुसार, यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसके साथ ही, वाराणसी न्यायालय में 19 दिसंबर 2025 को हुई कार्यवाही में प्रक्रिया संबंधी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में इसे गंभीर अनियमितता बताया गया है।


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