बरेली में स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही और अवैध क्लीनिकों के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। गलत इलाज के बाद गंभीर हालत में पहुंचे एक युवक को उसके परिजन बुधवार को ऑटो में लिटाकर सीएमओ कार्यालय ले आए। परिजनों ने आरोप लगाया है कि झोलाछापों पर कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। बारादरी थाना क्षेत्र के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल ने बताया कि उनका बेटा अजय पिछले एक महीने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। पेट दर्द के मामूली इलाज के लिए उसे एक व्यक्ति के पास ले जाया गया था, जिसने खुद को डॉक्टर बताया और कथित तौर पर बिना जरूरत ऑपरेशन कर दिया। इसके बाद अजय की हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों के अनुसार, पीलीभीत बाईपास स्थित एक निजी क्लीनिक में युवक का यह कथित ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद 25 दिनों तक पट्टियां बदली जाती रहीं और बार-बार टांके लगाए गए, लेकिन खून बहना बंद नहीं हुआ। अब युवक चलने-फिरने में असमर्थ है और लगातार उल्टियां कर रहा है। इस मामले की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक को सील तो कर दिया, लेकिन आरोपी के खिलाफ न तो कोई एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही पुलिस को कोई ठोस रिपोर्ट भेजी गई। इससे नाराज परिजनों का कहना है कि यदि क्लीनिक अवैध था, तो आरोपी खुलेआम कैसे घूम रहा है। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर झोलाछाप से साठगांठ का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद जानबूझकर कानूनी कार्रवाई से बचा जा रहा है। वहीं, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। कार्रवाई की मांग को लेकर परिजनों ने सीएमओ कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी, जिसके बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जांच का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। इस पूरे मामले पर सीएमओ बरेली विश्राम सिंह का कहना है कि क्लिनिक को सील करने की करवाई की जा चुकी और बरेलीवासियों से अपील करते हूं कि जिला अस्पताल में अपना इलाज कराए ताकि झोलाछाप किसी भी तरह का फायदा न उठा पाए।
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