भारतीय किसान यूनियन ने भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते को रद्द करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह समझौता भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगा। इसके विरोध में 12 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव घनश्याम वर्मा ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिकी कृषि, बागवानी और पशुधन संबंधी उत्पाद भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर बेचे जाएंगे। इससे भारतीय फसलें, जिनकी उत्पादन लागत अधिक है, नहीं बिक पाएंगी और भारतीय कृषि तथा किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। वर्मा ने यह भी बताया कि अमेरिकी सरकार अपने किसानों को बड़े पैमाने पर सब्सिडी देती है, जबकि भारत में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इस असमानता के कारण अमेरिकी उत्पाद भारतीय उत्पादों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में आकर ‘फ्री ट्रेड’ के तहत बिना किसी शुल्क के अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार उपलब्ध कराकर देश के 75 प्रतिशत किसानों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री पहले भी तीन कृषि कानूनों के माध्यम से किसानों को प्रभावित करना चाहते थे, लेकिन किसानों के प्रबल विरोध के कारण सफल नहीं हो पाए। घनश्याम वर्मा ने जोर देकर कहा कि भारत का किसान देश की रीढ़ है। यदि भारतीय कृषि और किसान बर्बाद होते हैं, तो देश भी बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा होने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ किसान एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। आंदोलन के पहले चरण में 12 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा। इसी क्रम में, अयोध्या जनपद में 12 फरवरी को सिविल लाइन स्थित गांधी पार्क में एक पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसके बाद प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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