शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच मौनी अमावास्या पर स्नान को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद बिना स्नान किए माघ मेला से चले गए। यह विवाद अभी थमा नहीं था कि शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय ने आठ मिनट का विडियो जारी गंभीर बातें बोली हैं। उन्होंने कहा-जब कोई विषय धर्म से संबंधित, राष्ट्र से संबंधित, हिंदुओं से संबंधित या मर्यादा से संबंधित होता है, तो हम उसकी तथ्यों के साथ जांच करने का प्रयत्न करते हैं। संबंधित लोगों से संवाद करते हैं और उसके बाद ही चर्चा करते हैं। शंभू हॉस्टल की घटना जहानाबाद की 18 वर्षीय NEET छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। 6 जनवरी को कमरे में अचेत पाई गई, 11 जनवरी को IGIMS अस्पताल में मौत। पुलिस ने शुरू में सुसाइड या दवा ओवरडोज बताया, मगर पोस्टमार्टम से गंभीर यौन हिंसा और चोटें साबित। CCTV फुटेज में छात्रा का कमरा बंद, आवाज न आने पर खिड़की से कुंडी खोली गई। एक युवक उसे गोद में उठा ले जाता दिखा। शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि ने बिहार की घटना पर कहा इस समय एक कलंक फिर भारतीय जल्लाद पार्टी के राज्य में उनके ऊपर लगा। एक हॉस्टल गया में है। रंजन नाम का व्यक्ति उस हॉस्टल का संचालन करता है। शंभू हॉस्टल नाम है उसका। वहां से एक फोटो लीक हुआ कि एक बच्ची को गोद में उठाकर वह बच्ची चीख रही है और जबरदस्ती कोई व्यक्ति मुंह बांधकर ले जा रहा है। उस बच्ची को कहां ले जा रहा है, कुछ पता नहीं। वहां का हॉस्टल चेतना शून्य, वहां की पुलिस चेतना शून्य—किसी ने भी उस विषय को गंभीरता से नहीं लिया। गायत्री की मौत और पुलिस का रवैया गायत्री नाम की बच्ची जिसकी मौत हो गई वह नीट की तैयारी कर रही थी। अपने गांव से एक दिन पहले ही हॉस्टल आई थी। उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और वहां उसकी मौत हो जाती है। थाना प्रभारी और पुलिस के आला अधिकारी इस घटना पर पर्दा डालते हैं। कहते हैं कि इस बच्ची ने आत्महत्या कर ली है। लेकिन जब बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आती है, तो रिपोर्ट में एक बात सिद्ध हो जाती है कि बच्ची के साथ बलात्कार किया गया। पुलिस और नेताओं पर संदेह देवेंद्र पांडेय के मुताबिक अगर पुलिस ने किसी घटना की बिना जांच किए, बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के ही अपराधी का बचाव करना शुरू कर दिया, तो इससे एक बात बड़ी स्पष्ट होती है कि अपराधी पुलिस के संरक्षण में है। पुलिस उसके दबाव में है, या कोई पुलिस वाला ही अपराधी हो सकता है। उसके बाद वहां के मंत्री, सांसद, विधायक अनेकों ऐसे नेता जिन्होंने पुलिस पर दबाव बनाए। यह बातें भी सार्वजनिक हुईं कि वे सब चाहते थे कि किसी भी तरीके से इस घटना को आत्महत्या निरूपित कर दिया जाए। एसआईटी जांच और डीजीपी का दबाव उन्होंने कहा एसआईटी की टीम गठित होती है इस घटनाक्रम की जांच करती है। किंतु एसआईटी की जो जांच है, वह सार्वजनिक नहीं होती। वहां के डीजीपी विनय कुमार बच्ची के माता-पिता को डराते-धमकाते हैं। उन्हें कहते हैं कि आप यह मान लो कि बच्ची ने आत्महत्या की है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी का अपराधिक रिकॉर्ड यह जो घटना हुई बच्ची के साथ बलात्कार हुआ, उसकी हत्या कर दी गई। यह साधारण हत्या नहीं है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच की जाए, तो हो सकता है इसमें वर्तमान सरकार में शामिल कई मंत्री नंगे हो जाएं। सम्राट चौधरी इस समय गृह मंत्री हैं। इनके बड़े अपराधिक प्रकरण चलते रहे हैं। इनका अपराधिक रिकॉर्ड गूगल में जाकर देखा जा सकता है। ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को ही यह पार्टी गृह मंत्री बनाती है। ये धर्म को बचाना नहीं चाहते, समाज का दमन करना चाहते हैं। इन्हीं की पार्टी के नेता ने उत्तराखंड में बलात्कार किया। बीच सड़क में बच्ची से बलात्कार के वीडियो सामने आए। नेताओं ने अपनी बच्चियों-भतीजियों से भी बलात्कार किए। यह कुकर्मियों का गिरोह बनकर रह गई है पार्टी। पुलिस परिवार को डराती है, मीडिया को धमकाती है। हिंदू समाज की असुरक्षा आज भारत में हिंदुओं की बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। हिंदू समाज, धर्म, मर्यादा, परंपराएं सुरक्षित नहीं हैं। शंकराचार्य जी को गंगा स्नान से रोका गया। वे गौ-हत्या, लव जिहाद, घुसपैठ, मंदिर संरक्षण की बात करते हैं। वृंदावन में गोस्वामियों के साथ मारपीट हुई। मंदिरों पर कब्जा कर लिया है। ये गौ-हत्यारे, औरंगजेबी कृत्य कर रहे हैं—मंदिर तोड़ रहे हैं, बलात्कारियों को बचा रहे हैं। यह किसी एक गायत्री की बात नहीं। हर घर में गायत्री, सीता, सरस्वती है। आज चुप रहे तो कल हमारी बारी। इन दरिंदों से समाज-राष्ट्र-धर्म बचाने के लिए हिंदुओं को संगठित होना पड़ेगा। गायत्री को वीरांगना घोषित कर सड़कों पर उतरिए। बलात्कारियों को घसीटिए। मर्यादा बचाते शहीद हो जाएं।
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