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चित्रकूट में रेलवे भूमि अधिग्रहण में मुआवजे पर विवाद:दर्जनों परिवारों ने आवागमन के रास्ते को लेकर DM से गुहार लगाई

चित्रकूट ट्रांसपोर्ट नगर रेलवे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित दर्जनों परिवारों ने बुधवार को जिलाधिकारी से गुहार लगाई। ये परिवार मुआवजे की दर और आवागमन के रास्ते को लेकर चिंतित हैं। शोभा सिंह का पुरवा और मजरा कसहाई के निवासियों ने अपनी समस्याएँ बताईं। पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे पिछले 40-45 वर्षों से इसी स्थान पर रिहायशी मकान बनाकर रह रहे हैं। अब उन्हें रेलवे की बाउंड्री से सटे मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के नोटिस मिले हैं, जिससे उनके सामने आवास का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, मौजा कसहाई के गाटा संख्या 2280, 2273, 2328 और 2329 में उनके मकान स्थित हैं। उत्तर मध्य रेलवे द्वारा लगभग 35 से 40 फीट भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इससे उनके 60 फीट चौड़े मकानों का मात्र 15-20 फीट हिस्सा ही शेष बचेगा, जो रहने योग्य नहीं होगा और आवागमन का रास्ता भी बाधित हो जाएगा। पीड़ितों का आरोप है कि उनकी भूमि आबादी की श्रेणी में आती है, लेकिन उन्हें कृषि भूमि की दर पर मुआवजा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, भूमि की रजिस्ट्री होने के बावजूद अधिक शुल्क के कारण दाखिल-खारिज प्रक्रिया लंबित है, जिससे मुआवजा पूर्व भू-स्वामी के नाम जारी हो रहा है। इससे वास्तविक निवासियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से चार प्रमुख मांगें रखी हैं: 1. कृषि भूमि के बजाय आबादी भूमि के उचित रेट पर मुआवजा दिया जाए। 2. मकानों के अधिग्रहण के बाद भी रेलवे द्वारा कम से कम 10 फीट का आवागमन मार्ग बनाया जाए। 3. दाखिल-खारिज न होने के कारण मुआवजा सूची में नाम न होने की समस्या का समाधान किया जाए। 4. प्रस्तावित रास्ते का मुआवजा किसी अन्य भू-स्वामी को दिए जाने से रोका जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।


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