आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का सब्जी विज्ञान विभाग ’56 कद्दू’ की नई और उन्नत किस्मों पर शोध कर रहा है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उपभोक्ताओं को बेहतर पोषण प्रदान करना है। अयोध्या मंडल सहित पूर्वांचल के किसानों को इन नई किस्मों से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। सब्जी विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा इस शोध परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। डॉ. झा ने बताया कि ’56 कद्दू’ एक प्रमुख कद्दू वर्गीय सब्जी है, जिसे विलायती कद्दू भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने इसकी कुछ प्रजातियां विकसित की हैं, लेकिन आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में इस पर पहले कोई कार्य नहीं हुआ था। डॉ. आस्तिक झा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से इस पर शोध कार्य चल रहा है, और लगभग 50 प्लाज्मा लाइनें विकसित की जा चुकी हैं। इन किस्मों में फलों की संख्या अधिक है, उपज भी बेहतर है, और फल विभिन्न रंगों के हैं। शोध का मुख्य फोकस इसकी पोषण गुणवत्ता पर है, क्योंकि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे कैंसर रोधी गुणों से युक्त बनाते हैं। यह सब्जी ऐसे समय में बाजार में उपलब्ध होगी जब अन्य कद्दू वर्गीय सब्जियों की उपलब्धता कम होती है, खासकर अक्टूबर से फरवरी तक। इसे अक्टूबर में बोया जाता है और दिसंबर-जनवरी तक, यानी 60 से 70 दिनों में तोड़ाई के लिए तैयार हो जाता है। इससे किसानों को अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा। जब डॉ. झा से किसानों को बीज की उपलब्धता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा अभी कोई प्रजाति विकसित नहीं की गई है। हालांकि, शोध कार्य में लगातार मिल रही सफलता को देखते हुए, विश्वविद्यालय अगले वर्ष तक किसानों को अपनी विकसित प्रजाति के बीज उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि लोग इसे गमले में भी लगाकर अपने खाने भर के लिए उपज ले सकते हैं।
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