इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने के फैसले को उचित ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड मंदिर प्रबंधन समिति के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने कहा कि समिति ने यह निर्णय तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और उन्हें हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया है, इसलिए इसे अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यह अवमानना याचिका गौरव गोस्वामी ने दायर की थी। उनका तर्क था कि नवंबर 2022 में हाईकोर्ट ने मथुरा की सिविल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें दर्शन का समय बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में समिति का फैसला न्यायालय के स्टे ऑर्डर के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि दर्शन अवधि बढ़ाने से मंदिर की पारंपरिक दिनचर्या प्रभावित होगी। वहीं, समिति की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक गतिरोध और तीर्थयात्रियों की परेशानी को देखते हुए 8 अगस्त 2025 को समिति का गठन किया था और उसे मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज, भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था बनाए रखने के व्यापक अधिकार दिए गए हैं। समिति ने 11 सितंबर 2025 की बैठक में विचार-विमर्श के बाद दर्शन समय बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया, जिसे 19 सितंबर को लागू किया गया। हाईकोर्ट ने माना कि 2022 का स्टे आदेश अलग परिस्थितियों में दिया गया था, जबकि वर्तमान निर्णय तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुचारु प्रबंधन के उद्देश्य से लिया गया है। अदालत ने कहा कि इसमें आदेश की अवहेलना का कोई तत्व नहीं है। इसी आधार पर अवमानना याचिका खारिज कर दी गई।
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