सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्तियों को दो साल के लिए तदर्थ न्यायमूर्ति नियुक्त करने का केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि एक तिहाई स्थाई व अस्थाई न्यायमूर्ति के पद खाली पड़े हैं। जिन्हें वर्षों से भरा नहीं जा सका। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने संविधान के अनुच्छेद 224 ए के तहत सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खां, न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम, न्यायमूर्ति सैयद आफताब अहमद रिजवी , न्यायमूर्ति रेणु अग्रवाल व न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की तदर्थ न्यायमूर्ति के रूप में नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा है। लगभग एक दशक पहले जूनियर लायर्स एसोसिएशन उ प्र ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को हाईकोर्ट में मुकद्दमों के बोझ को कम करने का प्रस्ताव भेजा था। एसोसिएशन का कहना था कि तमाम योग्य अधिवक्ता है जिन्हें जज नियुक्त किया जा सकता है।ऐसे अधिवक्ताओं को दो साल के लिए तदर्थ न्यायमूर्ति नियुक्त किया जाय।और उसमें से सत्यनिष्ठ,सही न्याय निर्णयन करने वाले जजों को स्थाई जज नियुक्त किया जाय। जिससे योग्य अनुभवी जजो व योग्य अधिवक्ताओं की नियुक्ति से मुकद्दमों के निस्तारण में तेजी आयेगी और युवा अधिवक्ताओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकेगा जो न्यायिक प्रणाली में सकारात्मक सुधार ला सकेगा।
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