शाहजहांपुर में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने अधीक्षण अभियंता को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रीपेड मीटर लगाए जाने से पहले जमा की गई सिक्योरिटी राशि वापस करने और बिजली कटौती के लिए रोस्टर घोषित कर उसकी सार्वजनिक सूचना उपलब्ध कराने की मांग की गई है। महानगर अध्यक्ष मोहम्मद सलाहुद्दीन ने इन मांगों को प्रमुखता से उठाया। पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा कि प्रीपेड मीटर लगने से पूर्व विभाग में उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गई सिक्योरिटी राशि वापस की जानी चाहिए। यह राशि इस आधार पर ली जाती थी कि उपभोक्ता को उधार बिजली दी जा रही है। प्रीपेड मीटर प्रणाली लागू होने के बाद इस सिक्योरिटी राशि को जमा रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। संगठन ने मांग की कि प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद फिक्स चार्ज, मिनिमम चार्ज और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी जैसी शुल्कों को समाप्त किया जाए। बिल की गणना केवल उपभोक्ता द्वारा उपयोग की गई विद्युत यूनिट के आधार पर ही होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि मकान बंद रहता है या विद्युत का उपयोग नहीं होता है, तो मिनिमम चार्ज और फिक्स चार्ज पूरी तरह समाप्त किए जाएं। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रीपेड मीटर लगाने से पहले लीगल मेट्रोलॉजी विभाग द्वारा मीटर की जांच अनिवार्य की जाए। लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के नियमों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मीटर की जांच सुनिश्चित की जाए और इसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग की निर्धारित की जाए। प्रीपेड मीटर लगाते समय उपभोक्ता को मीटर का मैनुअल और गारंटी कार्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। बिजली कटौती के लिए एक रोस्टर घोषित किया जाए और उसकी सूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। अघोषित बिजली कटौती को पूर्णतः प्रतिबंधित करने की मांग भी की गई।पदाधिकारियों ने शिकायत की कि अधिशासी अभियंता और उपखंड अधिकारी कार्यालयों में प्रार्थनापत्र जमा करने पर रसीद नहीं दी जाती। उन्होंने निर्देश देने की मांग की कि किसी भी प्रार्थनापत्र को प्राप्त करते समय अनिवार्य रूप से रसीद दी जाए। साथ ही, विद्युत आपूर्ति और बिल सुधार से संबंधित शिकायत दर्ज करते समय एक शिकायत पर्ची बनाई जाए, जिसकी एक प्रति उपभोक्ता को भी उपलब्ध कराई जाए। उनकी मांग की है कि मीटर बदले जाने के पश्चात उन्हें लैब जांच के लिए भेजा जाता है, जिसके आधार पर उपभोक्ता पर विद्युत चोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तथा एफआईआर व भारी जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, जबकि अधिकांश मामलों में निर्धारित समय पर मीटर की जांच नहीं की जाती। सीलिंग सर्टिफिकेट न मिलने के कारण उपभोक्ता को मीटर जांच की तिथि, समय व स्थान की जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे भ्रष्टाचार व उत्पीड़न की स्थिति उत्पन्न होती है। इस पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है।
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