भारतीय रेलवे ने ट्रेन परिचालन के दौरान होने वाले खतरनाक हादसों को रोकने के लिए सिग्नल नियमों में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब अगर चलती ट्रेन दो हिस्सों में बंट जाती है, जिसे रेलवे की भाषा में ट्रेन पार्टिंग कहा जाता है, तो गेटमैन या कोई भी रेलवे कर्मचारी ट्रेन रोकने के लिए लाल झंडी नहीं दिखाएगा। रेलवे बोर्ड ने यह नई व्यवस्था उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) सहित देशभर के सभी रेलवे जोनों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, ट्रेन के दो हिस्सों में बंटने की स्थिति में गेटमैन लाल झंडी दिखाकर लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने का संकेत देते थे। लेकिन कई मामलों में ऐसा करने से ट्रेन का आगे वाला हिस्सा अचानक रुक जाता था, जबकि पीछे का कटा हुआ हिस्सा अपनी रफ्तार में चलता हुआ आगे वाले हिस्से से टकरा जाता था। इससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ जाता था। इसी जोखिम को खत्म करने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन पार्टिंग की स्थिति में स्टॉप सिग्नल (लाल झंडी) पर पूरी तरह रोक लगा दी है। रेलवे बोर्ड की उप निदेशक (यातायात) श्वेता शर्मा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब दिन के समय गेटमैन हरी झंडी दिखाकर लोको पायलट और गार्ड को सतर्क करेंगे। वहीं रात के समय टॉर्च या सफेद रोशनी को ऊपर-नीचे लहराकर संकेत दिया जाएगा। इससे लोको पायलट को यह जानकारी मिल जाएगी कि ट्रेन का कोई हिस्सा अलग हो गया है। नई व्यवस्था के तहत लोको पायलट इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाएंगे, बल्कि धीरे-धीरे ट्रेन की गति कम कर सुरक्षित तरीके से ट्रेन को रोकेंगे, जिससे पीछे के हिस्से से टक्कर का खतरा नहीं रहेगा। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे बोर्ड के निर्देशों का जोन में सख्ती से पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करेगा और हादसों की आशंका को कम करेगा। रेलवे के इस फैसले को ट्रेन संचालन के लिहाज से एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
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