DniNews.Live

Fast. Fresh. Sharp. Relevant News

गाजियाबाद में किसान बनकर 15 पुलिसवालों ने इंस्पेक्टर को दबोचा:2 घंटे एप्लीकेशन लिए टहलते रहे; 50 हजार रिश्वत लेते ही हल्ला मचा

स्पॉट- गाजियाबाद का निवाड़ी थाना समय- 12.15 बजे, 3 फरवरी। SHO जयपाल सिंह रावत अपने ऑफिस में फरियादियों को सुन रहे थे। अचानक उनके कमरे में 4 लोग दाखिल हुए। सभी शॉल ओढ़े थे, मुंह ढके हुए थे। SHO उनमें से एक को पहचान जाते हैं। फरियादियों को बाहर बैठने को कहा जाता है। कमरे में आए व्यक्ति ने शॉल के अंदर से 500 रुपए की एक गड्‌डी इंस्पेक्टर के सामने रख दी। बोले- पूरे 50 हजार हैं…गिन लीजिए। इंस्पेक्टर बोले- पूरे तो है न, उन्होंने रुपए पैंट की दाहिनी पॉकेट में रख लिए। इसके तुरंत बाद थाने में मौजूद करीब 13-14 फरियादियों ने अपने शॉल हटा दिए, जिन्हें थाने में मौजूद लोग किसान समझ रहे थे। वो दरअसल, मेरठ विजिलेंस के लोग थे। 3 लोग SHO के कमरे में दाखिल हुए, तो इंस्पेक्टर हड़बड़ाकर बोले- कौन हो…बाहर निकलो। बाहर खड़े गनर ने उन्हें भगाने के लिए धकेलना शुरू किया, मगर उनमें से एक बंदे ने एक आईकार्ड निकालकर दिखाया। फिर हल्ला मचा कि विजिलेंस का छापा पड़ा है। इंस्पेक्टर को उनके ही थाने में मुल्जिम की तरह खींचकर बाहर लाया गया। रुपए विजिलेंस ने अपने कब्जे में लिए और थाने में इंस्पेक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। वर्दी में इंस्पेक्टर की अरेस्टिंग नहीं हो सकती थी, इसलिए घर से उनके सादे कपड़े मंगवाए गए। अब इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू हो गई है। उन्हें विजिलेंस गाजियाबाद से मेरठ लेकर गई है। अब अरेस्टिंग से पहले की घेराबंदी की कहानी समझिए… 3 गाड़ियों में विजिलेंस टीम पहुंची, 100 मीटर पहले खड़ी की गईं
इस छापेमारी की शुरुआत मंगलवार सुबह 10 बजे से होती है। गाजियाबाद के निवाड़ी थाने के इंस्पेक्टर (SHO) जयपाल सिंह रावत अपने ऑफिस में फरियाद सुन रहे थे। थाने में एक दरोगा और 3 सिपाही भी वर्दी में घूम रहे थे, मुंशी अपने कमरे में फाइल में कुछ लिख रहे थे। थाने के गेट से 100 मीटर पहले 3 गाड़ियां रुकती हैं, इस गाड़ी से विजिलेंस टीम के इंस्पेक्टर कृष्णवीर सिंह उतरे और देखा कि कोई थाने के गेट पर है तो नहीं, उनके साथ 15 लोगों की टीम थी, जो सादे कपड़ों में थी। सिपाही अनुज ने शर्ट कमीज पहन रखी थी, ऊपर से शॉल ओढ़े हुए थे। वो थाने में दाखिल हुए और पहरा पर खड़े सिपाही से कहा- मेरा मोबाइल चोरी हो गया है, किससे मिल लें? सिपाही ने कहा- इंस्पेक्टर साहब, अंदर बिजी हैं, तुम अपनी अप्लीकेशन लिख लो। फिर सामने वाले कमरे में मुंशी को दे देना, मुहर लगाकर वो वापस दे देगा। इस तरह से 1-1 करके सभी विजिलेंस के सिपाही थाने में फरियादी बनकर दाखिल हुए। कोई अप्लीकेशन लिखने लगा, कोई पुलिस वालों को अपने पड़ोसी का झगड़ा समझाने लगा। इनमें से एक सिपाही ने मोबाइल पर विजिलेंस इंस्पेक्टर कृष्णवीर को मैसेज भेजा कि SHO कमरे में ही है। मुंशी डाक के कागजों पर साइन करवा रहा है।
पैसे लेते ही 1 इशारा, सबने इंस्पेक्टर को दबोचा
इसके बाद कृष्णवीर, डीएसपी आजाद सिंह और इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह थाने में पहुंचे। उनके साथ वो पूर्व प्रधान राकेश कुमार भी थे, जिनसे SHO 50 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। पहरा के सिपाही से पूर्व प्रधान ने कहा- इंस्पेक्टर साहब ने बुलाया है, सिपाही अंदर गया और पूर्व प्रधान के बारे में बताया। इंस्पेक्टर ने सोचा कि पूर्व प्रधान पैसे लेकर आया होगा। फिर सबको कमरे में अंदर जाने दिया गया। सबने चादर ओढ़ रखी थी, सिर पर मफलर लपेटे हुए थे। पूर्व प्रधान इंस्पेक्टर के कमरे में दाखिल हुए, उन्होंने कहा- साहब, जो आपने कहा था, पूरे पैसे लाया हूं… ये कहते हुए उन्होंने नोटों की गड्‌डी इंस्पेक्टर की टेबल पर रख दी। इंस्पेक्टर ने कहा- कितने हैं? पूर्व प्रधान ने कहा- गिन लीजिए, पूरे हैं। इंस्पेक्टर ने मुस्कुराते हुए पेंट की दाहिनी जेब में रुपए रख लिए। इसके बाद सब बाहर आ गए। फिर 1 इशारा हुआ, और थाने में मौजूद सभी विजिलेंस ने शॉल और मफलर हटा दिए। फरियादी बनकर घूम रहे विजिलेंस टीम इंस्पेक्टर के कमरे में घुस गई। इंस्पेक्टर हड़बड़ाकर बोले- कौन हो… बाहर निकलो, यह देखते ही इंस्पेक्टर की सुरक्षा में तैनात गनर वहां से भागने लगा। इसके बाद टीम ने अपने बारे में बताया। टीम के साथ एक कर्मचारी गाजियाबाद डीएम कार्यालय का भी होता है, वह पुलिस वालों को असलियत बताता है कि ये सब एक ट्रैप है। इसके बाद इंस्पेक्टर के आवास से उनके कपड़े मंगवाए जाते हैं। उनको कहा जाता है कि वर्दी उतारकर सादे कपड़े पहन लीजिए। इंस्पेक्टर के खिलाफ उनके ही थाने में एफआईआर लिखी गई। फिर उन्हें सादे कपड़ों में मुल्जिम की तरह खींचकर गाड़ी में बैठाया गया। टीम उन्हें मेरठ के विजिलेंस ऑफिस लेकर गई है, अब आगे की पूछताछ होगी, ये भी कहा जा रहा है कि इंस्पेक्टर की संपत्तियों की जांच होगी। पैसों को खुद डील करते थे इंस्पेक्टर
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले जयपाल सिंह रावत 1996 में सिपाही भती हुए, फिर हेड कॉन्स्टेबल रहे। वह 2013 में परीक्षा देकर सिविल पुलिस के दरोगा बने। इसके बाद हापुड़ में तैनात रहे। 2 साल पहले इंस्पेक्टर प्रमोट होने के बाद गाजियाबाद के निवाड़ी थाने में पोस्टिंग मिली। थाने के स्टाफ के मुताबिक, इंस्पेक्टर पैसों को लेकर डीलिंग खुद ही करते थे। सुबह 7 बजे थाने के आवास से ही मिलने वाले आ जाते थे, थाने में किसके खिलाफ केस लिखना है? किसे जेल भेजना है? वह खुद तय करते थे। विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि 50 हजार की रिश्वत देने वाले पूर्व प्रधान की घर के नीचे बैंक की ब्रांच है, यहां से जनरेटर की बैटरी चोरी हो गई। CCTV में सफेद कार से आए चोर भी दिख रहे थे। पूर्व प्रधान ने थाने में अप्लीकेशन दी, मगर इंस्पेक्टर ने चोरी का केस दर्ज नहीं किया। 3 फरवरी को जब विजिलेंस ने थाने के ऑफिस की तलाशी ली, तब ये अप्लीकेशन भी टेबिल के नीचे मिल गई। 2 जनवरी को पूर्व प्रधान पर लिखी थी FIR
अबुपुर गांव में रहने वाले राकेश कुमार उर्फ बिट्‌टू गांव में 2005 तक प्रधान रहे। पूर्व प्रधान की पत्नी हापुड़ के हाफिजपुर में सरकारी टीचर हैं। पूर्व प्रधान ने बताया- 2 जनवरी, 2026 को मेरे खिलाफ एक केस पुलिस ने दर्ज किया। यह केस मेरे खिलाफ विजय सिंह ने लिखाया कि मैंने सीएम और पीएम के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। 2 तारीख की शाम 4 बजे घटना दिखाई गई, उस समय मैं SBI बैंक में था। मैंने कहा कि मेरी लोकेशन देखी जाए। CCTV चेक की जाए। मैंने किसी भी ग्रुप में कुछ नहीं लिखा। मेरी गांव के विजय सिंह से चुनावी रंजिश चल रही है। मेरे खिलाफ साजिश करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बाद इंस्पेक्टर जयपाल रावत मेरे गांव आए। कहा- तुझे जेल भेज दूंगा, नहीं तो 50 हजार रुपए दो। FIR हुई है। मैं मिन्नत करता रहा, लेकिन वो नहीं माने। इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद में पुलिस अफसरों से शिकायत की। मगर कहीं से कोई मदद नहीं मिली। तब राकेश कुमार ने मेरठ विजिलेंस से मदद मांगी। अब निवाड़ी थाने में हुई और गड़बड़ियां भी जानिए थाने के निरीक्षण में खुली थी पोल
18 दिसंबर, 2025 को निवाड़ी थाने में DCP देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने निरीक्षण किया। DCP ने एक-एक पुलिसकर्मी और दरोगा से शस्त्रों की जानकारी ली। जहां इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत भी खड़े थे। यहां 2 दरोगा रिवाल्वर में मैगजीन ही नहीं लगा सके थे, इसकी वीडियो ने खूब फजीहत कराई थी। दूसरे थाने का झूठा केस एक घंटे में दर्ज किया
निवाड़ी थाने के दो दरोगा ने मोदीनगर में महिला के साथ दिसंबर में शराब पार्टी की। जहां महिला ने पुलिस के बल पर लोगों को गालियां दीं कि जाट की बेटी हूं, 50 थार खड़ी-खड़ी खरीद दूंगी। जिसके बाद दोनों दरोगा महिला को लेकर निवाड़ी थाने पहुंचे और अभिषेक नेहर और शुभम के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। विजिलेंस इंस्पेक्टर बोले- ऐसा केस बनाएंगे जमानत न हो सके
पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने विजिलेंस की कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर जयपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया। जहां उन्हें आज मेरठ की कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा। विजिलेंस टीम के इंस्पेक्टर कृष्णवीर ने कहा- यह विजिलेंस का मुकदमा है, पूरे साक्ष्य पर हम काम कर रहे हैं। केस ऐसा तैयार करेंगे कि हाईकोर्ट से जमानत आसानी से नहीं हो सकेगी। …………….. ये खबर भी पढ़ें….
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- अयोध्या GST अफसर ने थूककर चाटा:भैंस के मांस के नाम पर गौमांस विदेशों में भेजा जा रहा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह इस्तीफा वापस लेने पर तंज कसा। उन्होंने हंसते हुए कहा- बरेली मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने के बाद जो त्याग पत्र दिलवाया गया था। वो वापस हो चुका है। आदमी थूक कर चाट चुका है। हमने तभी कहा था कि ये जो त्याग पत्र दिया गया है वो चार दिन में वापस होगा। और वही हुआ। पढ़ें पूरी खबर…


https://ift.tt/GBlty8e

🔗 Source:

Visit Original Article

📰 Curated by:

DNI News Live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *