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संभल में शब-ए-बरात मनाया गया:इबादत कर गुनाहों की माफी मांगी, रोशनी से जगमगाए कब्रिस्तानों में फातिहा पढ़ी

संभल में शब-ए-बरात का पर्व पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने घरों और मस्जिदों में रात भर जागकर अल्लाह की इबादत की और अपने गुनाहों की माफी मांगी। इस अवसर पर लोगों ने कब्रिस्तान जाकर अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर फातिहा पढ़ा और उनकी बख्शीश के लिए दुआएं कीं। मंगलवार को संभल में मुस्लिम समाज ने विशेष इबादत और रोजा रखकर यह पर्व मनाया। लोगों ने अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत की दुआएं मांगीं। साथ ही, घरों में हलवे और मिठाइयां बनाकर एक-दूसरे के घरों पर पहुंचाए और गरीबों में तकसीम किए। मस्जिदों में देश और दुनिया की सलामती के साथ संभल में अमन-शांति की दुआएं भी की गईं। कारी मोहम्मद गुलजार अशरफ ने शब-ए-बरात के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व पिछले साढ़े चौदह सौ साल से मनाया जा रहा है। शाबान महीने की 15वीं तारीख को पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रात भर इबादत करते थे और दिन में रोजा रखते थे। उनके अनुयायी होने के नाते, मुस्लिम समाज उनकी सुन्नत को जिंदा रखते हुए इस रात को मनाता है। देखें 4 तस्वीरें… उन्होंने बताया कि लोग पूरी रात इबादत करते हैं और सहरी करके दिन का रोजा रखते हैं। मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है, कुरान की तिलावत होती है और जिक्र-ओ-अजकार किए जाते हैं। इसके अलावा, कब्रिस्तान जाकर दिवंगत परिजनों के लिए दुआ-ए-मगफिरत की जाती है। उम्मत-ए-मुस्लिमा और कौम की सलामती के लिए भी विशेष दुआएं मांगी जाती हैं। नवाब साद आदिल ने कहा कि मल्लशाह बाबा के मज़ार पर भी बड़ी संख्या में लोग फातिहा और दुरूद पढ़ने पहुंचे। साबर साहब ने बताया कि लोगों ने मगरिब और ईशा की नमाज़ें यहीं अदा कीं। उन्होंने कहा कि चारों ओर रौनक है और लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर दुआ-फातिहा कर रहे हैं। साबर साहब ने बताया कि लगभग 17-18 दिनों के बाद रमज़ान-उल-मुबारक का महीना शुरू होगा। उन्होंने अहले-वतन के लोगों से अपील की कि वे आपस में मेलजोल और भाईचारा कायम रखें तथा आने वाले सभी त्योहारों को शांति और सद्भाव के साथ मनाएं।


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