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न्यूजीलैंड में पंजाबियों की पुलिस में भर्ती पर प्रदर्शन:लेफ्ट विंग बोला- कीवी बनो या देश छोड़ो; 2 बार नगर कीर्तन रोक चुके

सिखों का नगर कीर्तन रोके जाने के बाद अब न्यूजीलैंड पुलिस में पंजाबियों की भर्ती का विरोध शुरू हो गया है। मैनीकॉ पुलिस स्टेशन में हुए भर्ती सेमिनार का स्थानीय डेस्टिनी चर्च के ब्रायन टमाकी ने न्यूजीलैंड में भारतीय खासकर पंजाबियों की बढ़ रही संख्या के खिलाफ आज (31 जनवरी) को प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। ब्रायन टमाकी और उनके संगठन द फ्रीडम एंड राइट्स कोएलिशन का कहना है कि यह प्रदर्शन बेतहाशा इमिग्रेशन के खिलाफ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने न्यूजीलैंड को न्यूजीलैंड ही रहने दें, घुल-मिल जाएं या छोड़ दें का नारा दिया है। हालांकि पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने सुरक्षा कारणों से पुल पर मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन टमाकी और उनके समर्थक प्रदर्शन पर अड़े हुए हैं। पुलिस के रोकने के बाद प्रदर्शनकारी एक हार्बर ब्रिज के नीचे एकत्रित हुए और नारेबाजी की। नौकरी को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ… न्यूजीलैंड में FTA का भी विरोध शुरू
न्यूजीलैंड और भारत सरकार के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का भी टमाकी ग्रुप ने विरोध शुरू कर दिया है। इसके साथ न्यूजीलैंड फर्स्ट और वहां के राइट विंग इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध का कारण प्रवासियों, विशेषकर भारतीयों की बढ़ती संख्या है। हाल ही में सिख नगर कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने और कीवी लाइफस्टाइल अपनाने या देश छोड़ने जैसी धमकियां इंडियन को मिल रही हैं। जानें विरोध के 5 प्रमुख कारण राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहा टमाकी
डेस्टिनी चर्च का फाउंडर ब्रायन टमाकी न्यूजीलैंड का आकलैंड में लोगों को राष्ट्रवाद के नाम पर भड़का रहा है। इससे पहले वह सिखों के नगर कीर्तन को दो बार रोक चुका है और हाका कर चुका है। अब विवादित नेता ब्रायन टमाकी और द फ्रीडम एंड राइट्स कोएलिशन के साथ न्यूजीलैंड सरकार को खुली चुनौती दे रहा है। वह 31 जनवरी 2026 को ऑकलैंड हार्बर ब्रिज पर प्रदर्शन करने पहुंचा, लेकिन पुलिस ने रोक दिया है। इसके बाद प्रदर्शकारी पुल के नीचे एकत्रित हुए और न्यूजीलैंड में भारतीयों खासकर पंजाबियों की बेताहाशा इमिग्रेशन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान टमाकी ने कहा कि आज के दिन का सबसे खास पल वह था जब हमारा सामना पुलिस की घेराबंदी से हुआ। मैं साफ कर दूं कि मोर्चे पर तैनात पुलिसकर्मी समस्या नहीं हैं, वे तो बस दबाव और कठिन हालात में अपना काम कर रहे हैं, जबकि असली दिक्कत ऊपर बैठे भ्रष्ट नेतृत्व की है। हमने शांति और प्रार्थना का रास्ता चुना।


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