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मंत्री स्वतंत्र- विधायक बृजभूषण के टकराव से भाजपा में टेंशन:UP में छिड़ी कुर्मी Vs लोधी जंग; क्या IAS अफसर जिम्मेदार नहीं?

‘भाई साहब सड़कें खुदी पड़ी हैं। जितने भी प्रधान आए हैं, उन सभी के गांवों में समस्या है। हर घर नल योजना में जमकर लापरवाही हुई है। मैं क्या जवाब दूं?’ – बृजभूषण राजपूत, चरखारी विधायक ‘मैं 40 गांव चलने को तैयार हूं। पानी दिलाना हमारा काम है। अफसर मेरे साथ हैं। अगर कहीं सड़कें खुदी हैं और पानी नहीं मिल रहा है तो अफसरों को सस्पेंड कर दूंगा।’ – स्वतंत्र देव सिंह, जलशक्ति मंत्री यूपी के महोबा जिले में भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत और कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच 30 जनवरी को टकराव हुआ। अब ये मुद्दा सोशल मीडिया और गांव-गली में कुर्मी बनाम लोधी समाज का रूप ले रहा है। लोग इसे दो जातियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई मान रहे हैं। भाजपा के लिए भी ये चिंता का विषय बन गया है। बृजभूषण लोधी समाज से आते हैं, जबकि स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी। दोनों समाज की ताकत क्या है? राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे प्रकरण को कैसे देखते हैं, पढ़िए ये खास खबर… पहले पूरा मामला समझिए…
30 जनवरी को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह महाेबा में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां से निकले तो रास्ते में चरखारी विधायक बृजभूषण सिंह ने उनका काफिला रोक लिया। बृजभूषण के साथ करीब 100 से अधिक ग्राम प्रधानों का आरोप था कि जल जीवन मिशन के काम पूरे नहीं हुए हैं। पाइप लाइन लीकेज होने, नल कनेक्शन नहीं मिलने, टंकी टूटने और टंकी नहीं बनने से जनता परेशान है। इसको लेकर मंत्री और विधायक के बीच नोक-झोंक हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्वतंत्र सेना के पेज से बृजभूषण राजपूत को घेरा जा रहा है, कुर्मी समाज के युवा और नेता भी बृजभूषण पर आरोप लगा रहे हैं। वहीं, बृजभूषण राजपूत के समर्थक और लोधी समाज के युवा, स्वतंत्र देव सिंह को कटघरे में खड़ा कर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। पूरा विवाद कुर्मी बनाम लोधी समाज का होता जा रहा है, जिसने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी को फीडबैक मिल रहा है कि इससे दोनों जनप्रतिनिधियों से जुड़ी जातियों और समर्थकों में नाराजगी है। यही वजह है कि मंत्री का रास्ता रोककर घेराव करने वाले विधायक को पांच दिन बाद भी पार्टी की ओर से नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। अब जानिए इस मामले ने क्यों बढ़ाई भाजपा की चिंता सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बृजभूषण राजपूत से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली है। बृजभूषण ने उन्हें बताया है कि इस घटना से पहले वह मंत्री को कई बार पत्र लिख चुके थे। इसके बाद भी हर घर नल योजना में कोई सुधार नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की चिंता है कि बृजभूषण राजपूत के बाद अब कई अन्य विधायक भी क्षेत्र में मंत्रियों के साथ ऐसी हरकत न कर दें। लोध समाज को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। समाज के नेता पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार थे। भाजपा ने लोधी की जगह कुर्मी समाज के पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। लोध समाज से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से समाज के नेता पहले से असंतुष्ट थे। उसके बाद अब विधायक बृजभूषण राजपूत विवाद के बाद समाज में नाराजगी भी है। यदि समय रहते विवाद का हल नहीं निकला तो इसका असर वोट बैंक पर भी पड़ सकता है।
पूरे मामले पर फीडबैक जुटा रही भाजपा भाजपा इस विवाद को लेकर जमीनी फीडबैक जुटा रही है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और पोस्ट का भी आकलन किया जा रहा है। पार्टी की ओर से स्थानीय नेताओं को इस तरह के विवाद शांत कराने के लिए कहा गया है। सरकार और प्रदेश अध्यक्ष ने नहीं दिया दखल भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि पूरे मामले में सरकार और संगठन को दखल देकर इसे समाप्त करना चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत को एक साथ बैठाकर बात करनी चाहिए। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय का मानना है कि विधायकों की क्षेत्र में जवाबदेही है। जनता को दिखाना होता है। बेहतर होता कि वह विधायक बंद कमरे में स्वतंत्र देव सिंह से बात करते। अपनी ही पार्टी के मंत्री को इस तरह रोकना उनका एक अंदाज हो सकता है, लेकिन बात मर्यादित ढंग से कही जा सकती थी। जहां तक दोनों समाजों के बीच टकराव की बात है तो कुर्मी और लोध का कोई टकराव अब तक नहीं रहा है। वरिष्ठ पत्रकार रतन मणिलाल का कहना है कि मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार के मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें काफी बढ़ी हैं, अभी तक विपक्षी नेता कहते थे, लेकिन अब पार्टी के विधायक और पदाधिकारियों ने भी सवाल उठाए हैं। मंत्रियों को रोकना, ये संकेत है कि सरकार को कार्यप्रणाली में बदलाव करना चाहिए। यदि यह बढ़ता रहा तो सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा। मंत्रिमंडल में बदलाव होना चाहिए, अब यह विवाद दो समाजों का विवाद बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर दोनों समाज आमने-सामने हैं।
तो दोनों पर कार्रवाई होगी? भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया, बीते दिनों ब्राह्मण विधायकों को एक तरफा चेतावनी देकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ब्राह्मणों की नाराजगी झेल चुके हैं। इसलिए इस मामले में पार्टी एकतरफा कार्रवाई करने से बच रही है। यदि कार्रवाई हुई तो जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत दोनों पर करनी होगी। इसलिए पार्टी ने मामले को धीरे-धीरे शांत करने का मध्यम मार्ग अपनाया है। पूरे विवाद का एक पहलू ये भी…क्या अधिकारी जिम्मेदार नहीं? लगातार पीछे हो रहा है प्रोजेक्ट
जल जीवन मिशन के तहत यूपी में हर घर नल योजना के तहत घर-घर शुद्ध जल पहुंचाने के लिए 2024 तक समय अवधि निर्धारित थी। लेकिन यूपी में कामकाज की धीमी गति के चलते प्रोजेक्ट का समय लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। दिलचस्प बात है कि प्रोजेक्ट में अपर मुख्य सचिव से लेकर इंजीनियर तक सालों से इसी महकमें में काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी काम समय पर पूरा नहीं हो रहा है। बृजभूषण राजपूत का विवाद तो सुर्खियों में आ गया है, लेकिन बुंदेलखंड के दर्जनों विधायकों ने परियोजना को लेकर सरकार को शिकायती पत्र लिखे हैं। विधायक बृजभूषण राजपूत का भी कहना है कि वह बीते दो साल से विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव को हर घर नल योजना के घोटाले को लेकर पत्र लिख रहे हैं। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाकर सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है, जहां अधिकारियों ने फील्ड में काम नहीं किया, बिना काम के ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया है। एक गांव में पानी की टंकी नहीं बनी और भुगतान कर दिया। एक गांव में काम भी शुरू नहीं हुआ है और शत प्रतिशत काम पूरा बताया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी जो दावा कर रही हैं, उसमें 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। यदि जांच में जिलाधिकारी का दावा झूठा पाया जाता है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना है कि 30 जनवरी के बाद गांव में काम शुरू हो गया है, लेकिन मामले की जांच अभी बाकी है। ये हैं जिम्मेदार अधिकारी 1. अनुराग श्रीवास्तव 2. राजशेखर
—————— ये खबर भी पढ़ें… मंत्री स्वतंत्र से भिड़ने वाले विधायक बोले-अफसर झूठ बोल रहे:सड़कें टूटीं, गांवों में पानी भरा, यूपी विधानसभा में भी मुद्दा यूपी के महोबा से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत इन दिनों चर्चा में हैं। बृजभूषण ने 30 जनवरी को मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता रोक लिया था। अपनी विधानसभा के 100 गांवों में पानी न पहुंचने और पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत न होने पर नाराजगी जताई थी। कहा था- जिले के 90 प्रतिशत गांवों के लोग मुझसे पूछते हैं। मैं क्या जवाब दूं? पढ़ें पूरी खबर


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