गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में कथावाचक राजन जी महाराज द्वारा चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन भरत के चरित्र और शबरी के प्रेम से जुड़ी भावुक और सुंदर कथा सुनाई गई। कथा के दौरान भक्ति, प्रेम, त्याग और विश्वास की भावना प्रमुख रूप से देखने को मिली।
कथा में राजन जी महाराज ने भरत और शबरी के चरित्रों के माध्यम से सच्ची भक्ति और निष्काम प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भरत ने राजगद्दी को ठुकराकर भगवान राम की चरण पादुकाएं मांगकर उन्हें सिर पर धारण किया और अयोध्या लाकर शासन चलाने की जो शपथ ली, वह त्याग और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसा त्याग केवल सच्चा भक्त ही कर सकता है। भरत का चरित्र भाइयों के बीच प्रेम, सम्मान और त्याग की प्रेरणा देता है। राजन जी महाराज ने भरत को अयोध्या वंश को प्रकाशित करने वाला दीपक बताते हुए कहा कि यदि व्यक्ति सच्चे विश्वास के साथ प्रतीक्षा करता है, तो भगवान को भी अपने भक्त के पास आना पड़ता है।
कथा में शबरी के प्रसंग का भी बेहद भावुक वर्णन किया गया। शबरी द्वारा आंसुओं से प्रभु राम के चरण धोना और प्रेमपूर्वक कंद-मूल और फल अर्पित करने के दृश्य को भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। राजन जी महाराज ने बताया कि शबरी ने अपने गुरु मातंग ऋषि के वचनों पर पूर्ण विश्वास रखते हुए लंबे समय तक भगवान राम की प्रतीक्षा की, जो भक्ति और ईश्वर पर अटूट विश्वास का श्रेष्ठ उदाहरण है। इससे यह संदेश मिलता है कि भगवान अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
युवाओं को संबोधित करते हुए राजन जी महाराज ने कहा कि रामायण का हर चरित्र एक आदर्श को जीता है और हमें उन आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। भरत और शबरी श्रद्धा, प्रेम, त्याग और भक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि भगवान राम शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश देते हुए कहते हैं कि उन्हें केवल निस्वार्थ भक्ति ही प्रिय है।
कथा के दौरान
‘सीताराम चरण रति मोरे’, ‘रामा-रामा रटते-रटते बीते रे उमरिया’ और ‘शबरी सवारी रास्ता आएंगे रामजी’ जैसे भजनों से पूरा पंडाल भक्ति और करुणा के भाव से भर गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ला, ज्ञानेंद्र सिंह विधायक पनियरा सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आज की कथा के यजमान अजय श्रीवास्तव और मनोज मिश्र रहे। आयोजन समिति के सदस्यों के साथ-साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया।
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