बांदा में कोर्ट के किसी आदेश के बिना स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई के मामले में कोतवाली नगर थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस प्रकरण में जेल अधीक्षक अनिल गौतम, निलंबित किए जा चुके तत्कालीन जेलर विक्रम सिंह यादव सहित अन्य अज्ञात जेल कर्मियों पर ड्यूटी में घोर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने जांच के लिए अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) शिवराज के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम में सीओ बबेरू सौरभ सिंह, कोतवाली निरीक्षक बलराम सिंह, निरीक्षक प्रभु नाथ यादव और महिला थाना अध्यक्ष मोनी निषाद को शामिल किया गया है। एएसपी शिवराज को टीम का नोडल अधिकारी बनाया गया है। कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज पुलिस के अनुसार, माफिया रवि काना की गिरफ्तारी के लिए एसओजी टीम भी सक्रिय कर दी गई है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। वहीं लखनऊ में डीजीपी स्तर से भी मामले की गहन जांच और आरोपी माफिया की शीघ्र गिरफ्तारी के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। बताया गया कि मंगलवार देर शाम जेल चौकी इंचार्ज अनुराग पांडे की तहरीर पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि गौतमबुद्ध नगर न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के बाद बिना किसी लिखित न्यायालय आदेश या उच्चाधिकारियों को सूचना दिए रवि काना को जेल से रिहा कर दिया गया। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि जेल चौकी प्रभारी के प्रार्थना पत्र के आधार पर जेल में तैनात संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि मामला अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए बांदा पुलिस अधीक्षक स्तर से विशेष विवेचनात्मक टीम गठित कर निष्पक्ष और गहन जांच कराई जा रही है।
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