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गोरखपुर में विद्युत निगमों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन:बिजली कर्मियों ने किया विरोध, फैसला तत्काल वापस लेने की मांग

गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है। समिति का कहना है कि देशभर में बिजली क्षेत्र में हुए निजीकरण के प्रयोग विफल रहे हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों में निजीकरण लागू करना तर्कसंगत नहीं है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि पावर सेक्टर में राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों और निजीकरण के नकारात्मक अनुभवों को देखते हुए इस निर्णय पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। वित्तीय सुधार के लिए नया पैकेज प्रस्तावित समिति ने बताया कि विद्युत वितरण निगमों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार नया बेल-आउट पैकेज लाने की तैयारी कर रही है। इससे पहले एफआरपी, एपीडीआरपी, आर-एपीडीआरपी, उदय और आरडीएसएस जैसी योजनाएं लागू की जा चुकी हैं। संघर्ष समिति के अनुसार आरडीएसएस योजना के तहत पूर्वांचल और दक्षिणांचल क्षेत्रों में अरबों रुपये की लागत से बिजली ढांचे को सुदृढ़ किया गया है, जिससे वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। एटीएंडसी हानियों में उल्लेखनीय गिरावट समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में एटीएंडसी हानियां 41 प्रतिशत थीं, जो 2025 में घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई हैं। इसके बावजूद निजीकरण का निर्णय जल्दबाजी भरा और अनुचित है। संघर्ष समिति का कहना है कि 42 जनपदों में निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले देश के अन्य राज्यों और उत्तर प्रदेश में हुए निजीकरण के प्रयोगों की सफलता और विफलता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अन्य राज्यों में निजीकरण के प्रयोग विफल समिति ने ओडिशा सहित अन्य राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में किए गए निजीकरण के अधिकांश प्रयोग विफल रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार रद्द किए जा चुके हैं। संघर्ष समिति ने बताया कि आगरा में कार्यरत निजी बिजली कंपनी पर बिजली राजस्व दबाने के गंभीर आरोप हैं, जिससे पावर कॉरपोरेशन को हर साल भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। समिति ने स्पष्ट किया कि निजीकरण से न किसानों को कोई लाभ होगा और न ही आम उपभोक्ताओं को। समिति के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया एक बड़े घोटाले का रूप ले रही है।

संघर्ष समिति ने नवंबर 2024 में लिए गए निजीकरण के फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की है, ताकि ऊर्जा निगमों में कार्य-अनुकूल माहौल बन सके और बिजली कर्मी पूरी निष्ठा से काम कर सकें।
संघर्ष समिति के आह्वान पर निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 433वें दिन प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।


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