हापुड़ नगर पालिका परिषद में मंगलवार शाम जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) की टीम ने छापा मारा। विभाग को नगर पालिका द्वारा करीब 2 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गबन का संदेह है। कार्रवाई के दौरान नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी सकते में नजर आए। 100 से ज्यादा ठेकेदार, लेकिन ITC नहीं लौटाई नगर पालिका परिषद में सौ से अधिक पंजीकृत ठेकेदार शहर में विभिन्न विकास कार्यों को अंजाम देते हैं। इन कार्यों के भुगतान के बाद संबंधित फर्मों को जीएसटी जमा करना होता है। कई मामलों में ठेकेदार बिल जारी करते हैं, जिसके आधार पर उन्हें ITC का क्लेम मिलता है। नियमानुसार यह ITC नगर पालिका के माध्यम से जीएसटी विभाग को लौटाई जानी चाहिए, लेकिन फिलहाल नगर पालिका पर करीब दो करोड़ रुपये की ITC बकाया पाई गई है। संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में हुई जांच एसआईबी के संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में उपायुक्त विमल कुमार दूबे, सहायक आयुक्त विपिन शुक्ला और सीटीओ सतीश तिवारी की टीम मंगलवार शाम नगर पालिका पहुंची। टीम ने घंटों तक दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की। संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि नगर पालिका में विकास कार्यों के भुगतान पर जीएसटी अधिनियम की धारा 42 और 43 के तहत ITC विभाग को लौटाना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नगर पालिका द्वारा यह राशि विभाग को वापस नहीं की जा रही थी, इसी शिकायत पर कार्रवाई की गई। लेजर में फंसी मिली 2 करोड़ की ITC जांच के दौरान नगर पालिका के ITC लेजर में राज्य कर और केंद्र कर विभाग की एक-एक करोड़ रुपये की ITC पड़ी हुई पाई गई। इसके अलावा अन्य भुगतानों में भी ITC के समायोजन के संकेत मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है। जीएसटी विभाग की टीम ने नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपलब्ध ITC की राशि तत्काल विभाग में जमा कराई जाए। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
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