बलरामपुर में अपर सत्र न्यायाधीश एससी/एसटी की अदालत ने दलित युवक की हत्या के मामले में चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। शासकीय अधिवक्ता रणधीर सिंह ने बताया कि यह मामला थाना पचपेड़वा क्षेत्र के ग्राम परसोना का है। ग्राम निवासी उमिला ने 26 जून 2016 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर के अनुसार, उमिला के पति राम सूरत को गांव के ही तिरु, रिखीराम, नथिया यादव और चिकवा कुर्मी वीडियो देखने के बहाने घर से बुलाकर ले गए थे। बाद में उनकी हत्या कर शव को बांधा नाले में फेंक दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादिनी सहित अन्य गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए। अभियोजन ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि प्राथमिकी झूठी है और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। साथ ही गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने की बात भी कही गई। दोनों पक्षों के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को दोषी पाया। इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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