गोरखपुर में भारत कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) और उससे जुड़े छात्र-युवा संगठनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। शैक्षणिक संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन DM के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में UGC इक्विटी नियम को लागू करने और सरकारी निकायों में आरक्षित वर्ग की रिक्त सीटों को तत्काल भरने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। संगठनों का कहना है कि यह स्थिति उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की बढ़ती गंभीरता को दर्शाती है। शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव का मुद्दा उठाया ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा में समान अवसर नहीं मिल पा रहा है। संगठनों का कहना है कि संस्थागत स्तर पर इन शिकायतों के समाधान के लिए ठोस व्यवस्था की आवश्यकता है। भाकपा (माले) ने UGC इक्विटी नियम को शैक्षणिक संस्थानों में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम बताया। ज्ञापन में कहा गया कि यह नियम भेदभाव की शिकायतों के निस्तारण और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि UGC इक्विटी नियम को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के अधीन सभी सरकारी निकायों में आरक्षित वर्ग की खाली पड़ी सीटों को शीघ्र भरा जाए, ताकि शिक्षा और रोजगार में वंचित तबकों को उनका अधिकार मिल सके।
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