हाथरस के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में रिश्वत लेते पकड़ी गई महिला क्लर्क बबीता चौहान को अलीगढ़ की एंटी करप्शन कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। एंटी करप्शन टीम ने कल उन्हें 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बबीता चौहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डी-फार्मा और बी-फार्मा प्रशिक्षुओं की इंटर्नशिप सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों की प्रभारी थीं। यह मामला सिकंदराराऊ निवासी प्रशांत परमार से जुड़ा है। प्रशांत ने बी-फार्मा करने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इंटर्नशिप के लिए दो सप्ताह पहले सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। आरोप है कि इंटर्नशिप के लिए सीएचसी आवंटित करने के एवज में महिला लिपिक बबीता चौहान उनसे 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रही थीं और लगातार चक्कर लगवा रही थीं। प्रशांत ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए रिश्वत देने से इनकार कर दिया था। उनका आरोप था कि बिना रिश्वत के बबीता चौहान इंटर्नशिप के लिए सीएचसी आवंटित नहीं कर रही थीं। इसके बाद प्रशांत परमार ने अलीगढ़ की एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को बबीता चौहान को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीम ने उन्हें अलीगढ़ की एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खासी चर्चा रही। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को यह डर भी सताता रहा कि कहीं इस मामले में वे भी न फंस जाएं।
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