सिद्धार्थनगर के मंगलवार को मोहाना थाना परिसर से बाल विवाह मुक्ति रथ को थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन और समाज में जनजागरूकता फैलाना है। यह अभियान मानव सेवा संस्थान सेवा और पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। यह जागरूकता रथ अगले 30 दिनों तक जनपद के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भ्रमण करेगा। इस दौरान लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी जाएगी। थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने जोर दिया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है, जिसका नकारात्मक असर पूरे समाज पर पड़ता है। थानाध्यक्ष ने बाल विवाह निषेध अधिनियम का उल्लेख करते हुए बताया कि बाल विवाह कराना, उसका समर्थन करना या उसमें किसी भी प्रकार का सहयोग करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूक रहें और ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित संस्था तक पहुंचाएं। बाल विवाह मुक्ति रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर पोस्टर, बैनर, पंपलेट, ऑडियो संदेशों और नुक्कड़ सभाओं के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। रथ में लगे प्रचार माध्यमों से यह संदेश दिया जाएगा कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मानव सेवा संस्थान सेवा के प्रतिनिधियों ने भी अपने अभियानों की जानकारी दी और लोगों से सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। कार्यक्रम में पुलिसकर्मी, संस्था के सदस्य और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
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