लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को केजीएमयू परिसर स्थित दरगाह शाहमीना शाह मजार पर चादर चढ़ाई। चादरपोशी के बाद भाजपा सरकार पर हमला करते हुए मजार को तोड़ने की कार्रवाई को इतिहास और विरासत के खिलाफ साजिश करार दिया। अजय राय ने कहा- यह मजार केजीएमयू की स्थापना से भी पहले से मौजूद है। KGMU ने मजार हटाने का जो नोटिस दिया है। वह गैरकानूनी है। उन्होंने कहा- सरकार विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को निशाना बना रही है। इतिहास को मिटाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। हर जगह तोड़फोड़ का आरोप अजय राय ने कहा- मौजूदा सरकार हर जगह सिर्फ तोड़फोड़ की नीति पर काम कर रही है। जब विकास करने की क्षमता नहीं बचती, तब ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे खड़े किए जाते हैं। कांग्रेस किसी भी कीमत पर लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान को तोड़ने नहीं देगी। मेडिकल कॉलेज से जोड़ा इतिहास कांग्रेस नेता ने कहा- लखनऊ नवाबों की तहज़ीब और विरासत का शहर है। यहां की इमारतें, मजारें और दरगाहें सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहर के इतिहास का हिस्सा हैं। संभव है कि इन्हीं बुजुर्गों की कृपा और विरासत के चलते इस स्थान पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो सकी और जमीन उपलब्ध हुई। अजय राय बोले- मजार को नोटिस देना गलत अजय राय ने मजार प्रबंधन को नोटिस दिए जाने की कार्रवाई को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत दोनों के लिए खतरनाक है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अगर ऐतिहासिक स्थलों को लेकर प्रशासनिक दबाव बनाया गया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी। KGMU प्रशासन हटाना चाहता है मजार लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) स्थित अवैध मजारों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 5 अवैध मजारों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। मजारों पर इस संबंध में नोटिस चस्पा किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ये मजारें विश्वविद्यालय परिसर की भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के बनाई गई हैं। परिसर के भीतर के मजार को 7 और बगल स्थित मजार को 15 दिन में खुद हटा लें, वरना प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। 7 से 15 दिन की समय सीमा दी KGMU परिसर में मजार हैं। एक मजार KGMU परिसर के बगल में स्थित है। मजारों को अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया गया है। परिसर के अंदर की एक मजार कच्ची है। उसे 7 दिन में हटाने का निर्देश दिया गया है। अन्य मजारों में पक्का निर्माण है। इस वजह से उन्हें हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। अन्यथा प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। KGMU प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थान है, जहां नियमों के तहत ही किसी भी प्रकार की संरचना की अनुमति दी जा सकती है। अवैध निर्माण न केवल संस्थान की गरिमा के खिलाफ हैं, बल्कि सुरक्षा और संचालन व्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं।
https://ift.tt/1qhHwYi
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply