सिद्धार्थनगर में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय सभागार में प्रस्तावित उद्योग बंधु बैठक का बहिष्कार कर दिया। संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जिसके कारण यह निर्णय लिया गया। संगठन का कहना है कि बैठकों में व्यापारी लगातार अपनी समस्याएं उठाते रहे हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इसी उपेक्षा के कारण व्यापार संगठन ने बैठक में शामिल न होने का फैसला किया। संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कसौधन ने कहा, “हम आज उद्योग बंधु बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं। जब तक हमें यह स्पष्ट आश्वासन नहीं मिल जाता कि हमारी बातों को सुना जाएगा और उनका निस्तारण किया जाएगा, तब तक हम बैठक में शामिल नहीं होंगे।” उन्होंने जोर दिया कि प्रशासन के सामने रखी गई समस्याओं पर अमल नहीं होता। व्यापार संगठन के अनुसार, उद्योग बंधु बैठकों का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करना है। हालांकि, ये बैठकें अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। समस्याओं पर निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी न तो समयबद्ध कार्रवाई करते हैं और न ही उनकी जवाबदेही तय होती है। संगठन ने सिद्धार्थनगर महोत्सव, सामूहिक विवाह कार्यक्रम और अन्य सरकारी योजनाओं में स्थानीय व्यापारियों की अनदेखी का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन आयोजनों में बाहरी ठेकेदारों को प्राथमिकता दी गई, जबकि जिले के स्थानीय व्यापारी और ठेकेदार पूरी तरह सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापार संगठन ने सिद्धार्थनगर महोत्सव में संगठन के पदाधिकारियों को सम्मान न दिए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्हें पर्याप्त पास जारी नहीं किए गए और न ही कोई पृथक व्यवस्था की गई, जिससे व्यापारियों में असंतोष है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन की ओर से यह आश्वासन नहीं मिलता कि व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा और उनका समयबद्ध निस्तारण होगा, तब तक उद्योग बंधु बैठक का बहिष्कार जारी रहेगा।
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