इटावा में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने बिजली विभाग से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। व्यापारियों ने स्मार्ट मीटर, सोलर उपभोक्ताओं के गलत बिल, बिजली आपूर्ति में लापरवाही और विभागीय कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित एक 19 सूत्रीय मांग पत्र अधीक्षण अभियंता को स्टेशन रोड स्थित कार्यालय में सौंपा गया। व्यापारियों ने मांग की है कि उपभोक्ताओं के हित में तत्काल सुधार किए जाएं और विभाग की मनमानी पर रोक लगे। ज्ञापन में कहा गया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी राशि वापस की जाए। प्रीपेड व्यवस्था लागू होने के बाद फिक्स चार्ज और मिनिमम चार्ज का कोई औचित्य नहीं रह जाता। व्यापार मंडल ने यह भी मांग की कि मीटर लगाने से पहले लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से जांच कराई जाए और हर साल मीटर की जांच सुनिश्चित हो। मीटर लगाते या उतारते समय मौके पर ही सीलिंग सर्टिफिकेट दिया जाए, ताकि उपभोक्ताओं का उत्पीड़न और भ्रष्टाचार रोका जा सके। अघोषित बिजली कटौती पर व्यापारियों ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की कि बिजली कटौती का रोस्टर जारी किया जाए और उसकी जानकारी सार्वजनिक हो। अधिशासी अभियंता और उपखंड अधिकारी कार्यालय में दिए जाने वाले प्रार्थनापत्रों पर अनिवार्य रूप से रिसीविंग दी जाए। बिजली आपूर्ति और बिल सुधार से जुड़ी शिकायत पर शिकायत पर्ची बनाकर उसकी प्रति उपभोक्ता को दी जाए। ज्ञापन में सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं को नेट मीटरिंग में आ रही भारी दिक्कतों का भी उल्लेख किया गया। रीडिंग घटवाने के लिए उन्हें विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मांग की गई कि सॉफ्टवेयर में सुधार कर बिल सही किए जाएं और अतिरिक्त उत्पादित बिजली का भुगतान उपभोक्ता को मिले। औद्योगिक उपभोक्ताओं के बिलों में पोर्टल और वास्तविक बिल की राशि एक समान दिखाई जाए। ज्ञापन सौंपते समय जिला अध्यक्ष आलोक दीक्षित के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। व्यापार मंडल ने सभी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने की मांग की।
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