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लखनऊ में UGC के सपोर्ट में छात्रों का हंगामा:पुलिस ने 2KM खदेड़ा तो दूसरी जगह से पहुंचे आंदोलनकारी, खींचकर बस में भरा

लखनऊ में मंगलवार को बिरसा आंबेडकर फुले छात्र संगठन (बापसा) उत्तर प्रदेश के बैनर तले UGC गाइडलाइंस-2026 के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट पर एकत्रित हुए। गेट नंबर-3 से परिवर्तन चौक तक समर्थन मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने करीब 2 किलोमीटर तक छात्रों को दौड़ाया। इस बीच दूसरी तरफ से छात्र परिवर्तन चौक पहुंच गए। वहां पर बैठकर जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद है। बापसा उपाध्यक्ष आकाश कठेरिया ने कहा- 2 दिन पहले यहां UGC के नए गाइडलाइंस के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था। बाहरी गुंडे लखनऊ यूनिवर्सिटी के कैंपस में आकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब धारा 144 नहीं लागू थी। अब धारा 144 लागू कर दी गई है। हम अपना प्रदर्शन करेंगे। कई जिलों से लोग आ रहे हैं। हम चाहते हैं कि यूजीसी के नए नियमों को पूरी तरीके से लागू किया जाए। प्रदर्शन की 4 तस्वीरें देखिए… आरक्षण, प्रतिनिधित्व और नियुक्तियों पर सवाल छात्र संगठन का कहना है कि UGC गाइडलाइंस 2026 इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के साथ लगातार भेदभाव के आरोप सामने आ रहे हैं। संगठन ने OBC, SC और ST कोटे के अंतर्गत शिक्षकों की नियुक्ति में नॉट फॉउंड सूटेबल (NFS) जैसे प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में OBC प्रोफेसर न होने का मुद्दा पोस्टर में दावा किया गया है कि जनवरी 2020 तक किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक भी OBC प्रोफेसर नियुक्त नहीं हुआ। इसे सामाजिक बराबरी के संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए संगठन ने UGC और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। भेदभाव के मामलों में बढ़ोतरी का आरोप छात्र संगठन ने कहा है कि देशभर में OBC, SC और ST के खिलाफ जातिवाद और भेदभाव के मामलों में लगभग 118 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और शीर्ष पदों पर आरक्षित वर्गों की भागीदारी को भी बेहद कम बताया गया है। आरक्षित पदों में भारी कमी पोस्टर में जुलाई 2025 में संसद में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्गों के लिए स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा आज भी खाली पड़ा है। UGC और सरकार से सीधी मांग बिरसा आंबेडकर फुले छात्र संगठन का कहना है कि जब तक UGC गाइडलाइंस को पूरी तरह लागू नहीं किया जाएगा, तब तक उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय और बराबरी सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी। संगठन ने मांग की है कि आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और खाली पदों को तुरंत भरा जाए।


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