कुशीनगर के खड्डा थाना क्षेत्र में वीराभार ठोकर से लगभग 500 मीटर उत्तर दिशा में नदी में एक शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे यह सूचना आग की तरह गांव में फैल गई और देखते ही देखते नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सबसे पहले लक्ष्मीपुर गांव के अर्जुन चौहान जो अपने खेत की ओर जा रहे थे, उन्होंने नदी में तैरता शव देखा। उन्होंने कोटवा टोला के प्रकाश चौहान को फोन कर सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रकाश ने भोला चौहान और सुदर्शन के बड़े भाई अलगू को बताया। नाव के सहारे विराभर घाट पहुंचे अलगू ने जब शव को पास से देखा तो उसकी पहचान कोटवा टोला निवासी 35 वर्षीय सुदर्शन राजभर पुत्र छांगुर जो 28 जनवरी के रात्रि 9.30 पर नदी में डूब गए थे उसी सुदर्शन का पहचान होते ही उनके भाई शंकर फफक पड़े और बेहोश हो गए। सुदर्शन के बड़े भाई अलगू का कहना है कि अभी कल ही बाहर से आए कि भाई का पुतला बना कर जला देंगे और काम क्रिया कर देंगे लेकिन आज जब शव की सुचना मिली तो मौके से पहुंच कर अपने भाई का शव पहचान किया क्यों मेरा भाई की पहचान उसके कटे अंगुलियों के वजह से हुई। परिजनों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 9:30 बजे सुदर्शन अपनी पत्नी अंजलि से यह कहकर घर से निकले थे कि वे नदी की ओर जा रहे हैं। दिन भर उन्हें दस्त की शिकायत थी और तबीयत ठीक नहीं थी, फिर भी वे देर रात घर से निकल गए। रात करीब 9:40 बजे नदी किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाले रामप्यारे (साधु) ने नदी की दिशा से किसी व्यक्ति की “मुझे बचाओ” की दर्दनाक चीख सुनने की बात कही। अंधेरा अधिक होने के कारण वे किसी को पहचान नहीं सके, लेकिन कुछ ही देर में आवाज अचानक बंद हो गई। उन्होंने आशंका जताते हुए गांव में शोर मचाया कि कोई व्यक्ति नदी में डूब रहा है।
28 जनवरी रात्रि में शोर सुनकर ग्रामीण दौड़ते हुए नदी किनारे पहुंचे। इसी दौरान यह बात सामने आई कि सुदर्शन रात में नदी की ओर गए थे और अब तक घर नहीं लौटे हैं। यह सुनते ही उनकी पत्नी अंजलि बदहवास हालत में रोते-बिलखते घटनास्थल पर पहुंचीं थी । सुदर्शन की मां ने भी बताया कि वे दिन में कई बार नदी की ओर गए थे, लेकिन इस बार देर रात तक घर नहीं लौटे। तत्काल डायल 112 पर सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और रातभर बांध, नदी किनारे और आसपास के संभावित स्थानों पर तलाश करती रही, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना पुलिस ने उपजिलाधिकारी को अवगत कराया। सुबह होते ही एसडीआरएफ टीम बुलाकर सघन सर्च ऑपरेशन की तैयारी की गई। इसी बीच बुधवार पूर्वाह्न वीराभार ठोकर के पास नदी में एक शव दिखाई देने की सूचना मिली। जब ग्रामीण नाव के सहारे वहां पहुंचे तो शव की शिनाख्त सुदर्शन के रूप में हुई। इसके साथ ही परिवार और गांव में मातम की लहर दौड़ गई। सुदर्शन तीन भाइयों में सबसे छोटे थे ,अलगू, शंकर और सुदर्शन। वे दो मासूम बच्चों के पिता थे। बड़ी बेटी निधि (9 वर्ष) गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा है, जबकि छोटा बेटा अभि (4 वर्ष) अभी नन्ही उम्र में है। परिजन बताते हैं कि सुदर्शन करीब 15 दिन पहले त्रिपुरा से मजदूरी कर लौटे थे और दोबारा बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे। एक वर्ष पहले त्रिपुरा में काम करते समय उनके दाहिने हाथ की तीन उंगलियां कट गई थीं, जिससे उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित हो गई थी। इसके बावजूद वे परिवार के भरण-पोषण के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे। घटना के बाद गांव की महिलाओं की सिसकियां और पुरुषों की नम आंखें इस दर्दनाक दृश्य की गवाही दे रही थीं। पत्नी अंजलि का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बेसुध हैं। बच्चे अब भी समझ नहीं पा रहे कि उनके पिता हमेशा के लिए उन्हें छोड़ गए। ग्रामीणों का कहना है कि रात में सुनी गई चीख ने सभी को झकझोर दिया, लेकिन अंधेरा और नदी का तेज बहाव किसी की मदद नहीं कर सका था,अगर दिन में इस तरह की घटना तो लोग बचा लेते । खड्डा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक पंचनामा की कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रथम दृष्टया मामला नदी में डूबने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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