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अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़े जाने का आरोप:सपा सांसदों का संसद भवन के बाहर किया विरोध,बोले-काशी की संस्कृति और पहचान को मिटाने की कोशिश

मणिकर्णिका घाट पर महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और अन्य प्राचीन संरचनाओं को तोड़े जाने के आरोप को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। सपा नेताओं ने इसे काशी की प्राचीन संस्कृति और विरासत पर सीधा हमला बताते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। ऐतिहासिक पहचान हो रही खत्म सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर लंबे समय से स्थापित अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और अन्य मूर्तियों को तोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनर्विकास के नाम पर काशी की ऐतिहासिक पहचान को समाप्त किया जा रहा है। राम गोपाल यादव ने कहा – बनारस में मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ की गई है। शुरू से ही वहां महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा थी और अन्य प्रतिमाएं भी थीं, जिन्हें तोड़ दिया गया। बनारस की अपनी एक प्राचीन संस्कृति है उसकी गलियां, उसके मंदिर, उसकी परंपराएं। इन्हीं सबका विध्वंस किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वाराणसी से सांसद हैं, इसके बावजूद काशी की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। बनारस की जनता हमेशा से चाहती है कि ऐसा कोई परिवर्तन न हो जिससे उसकी संस्कृति खत्म हो जाए। आज बनारस की पहचान को मिटाने की कोशिश हो रही है। अब जानिए इसपर प्रशासन का पक्ष वहीं प्रशासन का कहना है कि घाट के पुनर्विकास कार्य के तहत कुछ पुरानी संरचनाओं को हटाया गया है और किसी भी प्रतिमा या धार्मिक स्थल को जानबूझकर नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। प्रशासन के अनुसार, हटाई गई मूर्तियों और कलाकृतियों को सुरक्षित रखा गया है और उन्हें नए निर्माण में पुनः स्थापित किया जाएगा।


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