‘अंशु कश्यप को 10 सालों से जानता हूं। वह पैसों से ज्यादा दोस्तों और संबंधों को महत्व देता था। वह जिंदादिल इंसान था। दोस्तों पर पलभर में पैसा खर्च देता था। मात्र 500 रुपए के लिए वह सुसाइड कर लेगा, ये बात समझ में नहीं आ रही है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके।’ यह कहना है मडियांव स्थित रेस्टोरेंट में सुसाइड करने वाले कर्मचारी अंशु कश्यप के दोस्त अर्पित यादव का। अर्पित ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया- सुसाइड के पहले अंशु के नंबर से भाई और दोस्तों को सुसाइड नोट भेज गया था। वह सुसाइड नोट फारवर्ड किया हुआ था। ऐसे में मामला संदिग्ध लग रहा है। पढ़िए अंशु के दोस्त ने जो बताया… पहले पढ़िए पूरा घटनाक्रम… हरिओम नगर के रहने वाले 25 साल के अंशु कश्यप मूड्स बेकर्स में काम करते थे। वह 1 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे रेस्टोरेंट पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, अंशु ने थोड़ी देर काम किया। उसके बाद बिना किसी को कुछ बताए पहली मंजिल पर बने हॉल में चला गया। काफी देर वहां बैठा रहा। जब उसने समझ लिया कि अब यहां कोई नहीं आ रहा है तो कुर्सी पर चढ़कर छत के पंखे से फंदा बांधकर लटक गया। उसके पास रखे मेज पर सुसाइड नोट और उसका मोबाइल मिला। अंशु ने सुसाइड नोट में लिखा कि- मैं अंशु कश्यप जो कि मूड बेकर्स का कर्मचारी हूं। मैं मालिक का ईमानदार कर्मचारी हूं। मैं 500 रुपये के हिसाब देने में अपनी गलती छिपाने हेतु झूठ बोला। अब मैं मालिक की नजरों में गलत साबित हो चुका हूं।मैं बेइमानी-चोरी का धब्बा लेकर जीवित नहीं रह पाऊंगा।मैं खुदखुशी कर रहा हूं। सभी से गुजारिश है कि मेरी मां का ध्यान रखने की कोशिश करें। मैं चोर नहीं हूं, सभी को बताएं। बस इतना करना कि कभी मालिक के प्रति ज्यादा लॉयल मत बननाा। धन्यवाद। मैं चोर नही हूं। कुछ दिन पहले पैसों को लेकर हुआ था विवाद पुलिस की जांच में आया है कि अंशु का 500 रुपए के हिसाब को लेकर स्टाफ से विवाद हुआ था। इसके बाद उसे फटकार लगाई गई थी। अंशु इस फटकार से आहत था। इसी वजह से उसने सुसाइड कर लिया। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लेकर जाने लगी तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने थाने में करीब 3 घंटे हंगामा किया। पुलिस ने रेस्टोरेंट संचालक से पूछताछ और मामले में अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया तो लोग शांत हुए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। अब पढ़िए अंशु के दोस्त ने जो बताया… दोस्तों के मोबाइल पर पहुंचा सुसाइड नोट दोस्त अर्पित यादव ने बताया कि अंशु से हमारे पारिवारिक संबंध हैं। वह छल, कपट और हिंसावादी नहीं था। वह हम दोस्तों पर पांच मिनट में 500 रुपए खर्च कर देता था। वह 500 रुपए के लिए ऐसा नहीं कर सकता है। हम दोस्तों और परिवार के उमेश भैया के पास उसके व्हाट्सऐप नंबर से सुसाइड नोट मिला था। सुसाइड नोट पढ़ते ही उसको कॉल करना शुरू किया गया। जब कॉल नहीं उठा तो महज 15 से 20 मिनट में उसके रेस्टोरेंट पर पहुंचे। पता चला कि उसका शव फंदे से लटकता मिला है। परिवार की जिम्मेदारी उठा रखी थी अर्पित ने बताया कि अंशु ने काफी कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारी उठा ली थी। अपनी कमाई से पूरा घर चलाता था। काफी जिंदादिल इंसान था। जब भी मिलता था, काफी खुश रहता था। 9 साल से नौकरी कर रहा था, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। अचानक से 500 रुपए चोरी का इल्जाम लगाकर उसे चोर बना दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार किया पुलिस ने 2 फरवरी को अंशु के शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। मामले में अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज है। रेस्टोरेंट संचालक से भी पूछताछ हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने पर मौत के कारण का पता चलेगा।
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