बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित कर कतार में दर्शन कराने के लिए स्टील की रेलिंग लगायी जा रही है। 21 हजार किलो स्टील से लगने वाली इस रेलिंग के काम के लिए ठेका मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। आरोप है कि इस कंपनी के मुख्य पार्टनर मुस्लिम है। इस बात की जानकारी लगते ही हिंदूवादी आक्रोशित हो गए और उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल ठेका निरस्त करने की मांग की। फलाहारी महाराज ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका कनिका कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिलने पर साधु संतों ने आक्रोश जताया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमे कहा गया है कि जहां भगवान राधा कृष्ण ने महारास और माखन चोरी लीला की हो ,जहां बांके बिहारी विराजमान हों, उस स्थान पर गौ मांस खाने वाले, सनातन धर्म के विरोधी आएंगे तो ब्रज वासियों को सहन नहीं होगा, हमारे कृष्ण कन्हैया भी नाराज हो जाएंगे।
फलाहारी महाराज ने पत्र में लिखा है कि यह लोग सनातन धर्म के विरोधी हैं, हिंदुओं को काफिर कहते हैं, ऐसे लोगों को मंदिर प्रांगण से 1 किलोमीटर तक घुसने नहीं दिया जाएगा। हमारे सनातनियों में स्टील रेलिंग लगाने के लिए हजारों ठेकेदार हैं ,तो फिर हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले और मथुरा, काशी, अयोध्या को तोड़कर वहां नमाज अदा करने वाले मुगलों के वंशजों को यह ठेका क्यों दिया गया है। पहचान छुपाकर लिया ठेका दिनेश फलाहारी ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराइ जाये। उन्होंने कहा कि पहचान छुपा कर कनिका कंस्ट्रक्शन के मालिक सलीम अहमद ने जो ठेका लिया है उसको निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा यह ठेका किसी सनातनी भाई को मिलना चाहिए। बांके बिहारी मंदिर में मुस्लिम ठेकेदार के काम करने से ब्रजभूमि के साधु संत आक्रोशित है। अकबर ने किये थे स्वामी हरिदास जी के दर्शन बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाए जाने के मामले में हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य शैलेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि यह जानकारी नहीं है रेलिंग लगाने वाले कौन हैं। लेकिन बांके बिहारी जी के प्राकट्य कर्ता स्वामी हरिदास जी के दर्शन करने और संगीत सुनने के लिए तो स्वयं अकबर यहां आये थे।
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