इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद पवित्र और खास रात माना जाता है। यह रात इबादत, तौबा (पश्चाताप), माफी और अल्लाह की रहमत की रात कही जाती है। शब-ए-बारात हर साल हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं तारीख की दरम्यानी रात को मनाई जाती है। मुस्लिम समुदाय में इसे अल्लाह की बरकत और गुनाहों से माफी की रात के रूप में देखा जाता है, इसी कारण इसे आमतौर पर माफी की रात भी कहा जाता है।
कब्रिस्तानों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
शब-ए-बारात के मौके पर शहर के विभिन्न कब्रिस्तानों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। कानपुर के चुन्नीगंज, ईदगाह, कर्नलगंज और बाबूपुरवा सहित सभी प्रमुख कब्रिस्तानों में रात भर लोगों का आना-जाना जारी रहा। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की कब्रों की साफ-सफाई की, फूल चढ़ाकर अगरबत्तियां व मोमबत्तियां जलाकर कब्रों को रोशन करते हैं। इस दौरान फातिहा पढ़कर और मगफिरत के लिए दुआएं की जाती है।
मस्जिदों और घरों में विशेष इबादत
इस पवित्र रात में मुसलमान जागकर नमाज़ें अदा कर, कुरआन की तिलावत करते हैं और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहे। शहर की मस्जिदों और घरों में विशेष इबादत का आयोजन किया गया। बकरमंडी, ग्वालटोली, जाजमऊ और हलीम कॉलेज समेत कई इलाकों में धार्मिक जलसों का भी आयोजन कराये जाते है।
उलेमाओं की अपील
शहर के उलेमाओं और धार्मिक गुरूओं ने मुसलमानों से इस पवित्र रात में अधिक से अधिक इबादत करने, तौबा करने और गुनाहों की माफी मांगने की अपील की। साथ ही उन्होंने गरीबों की मदद करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने पर भी ज़ोर दिया।
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