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कानपुर में बारिश और ओले गिरने का अलर्ट:सुबह बादल छाए, शताब्दी-वंदेभारत और राजधानी देरी से आईं

कानपुर शहर का मौसम मंगलवार सुबह बदला रहा। घने बादल छाए, कुछ जगहों पर हल्का कोहरा भी रहा। सर्द हवा ठंडक को बढ़ाए है। आज मौसम विभाग ने बारिश और ओले की आशंका जताई है। कोहरे की वजह से करीब 30 ट्रेनें घंटों देरी से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचीं। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव के पास बैठे दिखे। न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस रहा। एक दिन पहले तेज धूप ने ठंड से दी थी राहत
सोमवार की बात करें तो जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मौसम ने करवट बदली। दोपहर होते-होते तेज धूप निकल आई, जिससे हल्की गर्मी का एहसास हुआ। धूप निकलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली और बाजारों व सड़कों पर चहल-पहल बढ़ती दिखाई दी। अधिकतम तापमान 25.9 डिग्री रहा जो कि सामान्य से 3.9 डिग्री ज्यादा है। हालांकि देर शाम से ही एक बार फिर सर्द हवाओं ने एक बार फिर गलन को बढ़ाया। बूंदाबादी और ओले गिरने के आसार
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण आने वाले 24 घंटे में बूंदाबांदी हो सकती व ओले भी गिर सकते हैं। दिन में धूप निकलेगी। दिन के तापमान बढ़ेगे। पश्चिमी विक्षोभ निकलने के बाद उत्तर पश्चिमी हवाएं रात व सुबह के तापमान को गिराएंगी, जिससे एक बार फिर से गलन वाली सर्दी का एहसास होगा। 31 ट्रेनें देरी से आईं
शहर में कोहरा भले ही न पड़ रहा हो लेकिन आसपास के जिलों में कोहरे के चलते 31 ट्रेनें तय समय से घंटों देरी से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंची। नई दिल्ली से हावड़ा जाने वाली कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस (12302) 01.21 घंटे लेट रहीं। इसके अलावा नई दिल्ली से कानपुर सेंट्रल आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस (12034) 01.04 घंटे देरी से आई। नई दिल्ली से बनारस जाने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस (22416) 49 मिनट लेट रही। खेती-किसानी के लिए कैसा रहेगा फरवरी
बीएचयू के कृषि विभाग के वैज्ञानिक प्रो. पीके सिंह के मुताबिक, गेहूं की फसल के लिए फरवरी का मौसम सामान्य रूप से अनुकूल माना जा रहा। हालांकि, दलहनी फसलों के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पीके सिंह कहते हैं- बारिश और ओलावृष्टि होने पर गेहूं की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। जबकि, दलहनी और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहेगा। वहीं, बारिश के बाद अगर पाला पड़ता है, तो इसका असर खासतौर पर आलू और मटर की फसलों पर पड़ सकता है। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।


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