प्रयागराज के माघ मेले में चाक-चौबंद चिकित्सकीय सुविधाओं के बावजूद सैकड़ों मरीजों को एसआरएन अस्पताल रेफर करना पड़ा। तीन जनवरी से एक फरवरी तक 428 मरीज मेले से स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) की ओपीडी पहुंचे, जबकि 278 को मेला वार्ड में भर्ती किया गया। मेले में सर्दी-जुकाम, बुखार, पेट दर्द जैसी बीमारियों के मामले बढ़े। एसआरएन ओपीडी में आए करीब 40 प्रतिशत मरीजों को सर्दी लगने से पेट दर्द, उल्टी-दस्त, हाइपोथर्मिया व सांस लेने में तकलीफ हुई। इस बार त्रिवेणी और गंगा अस्पताल में मात्र 20-20 बेड की व्यवस्था की गई। साथ ही 12 प्राथमिक उपचार केंद्र और 75 चिकित्सक (19 विशेषज्ञ सहित) तैनात थे। लेकिन दोनों अस्पतालों में आईसीयू की सुविधा नहीं थी। महाकुंभ के दौरान छावनी अस्पताल ने इनमें 10-10 बेड के आईसीयू बनाए थे।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके तिवारी ने कहा मौके पर ही इलाज उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को एसआरएन रेफर क्यों किया गया, इसकी जांच करूंगा। उन्होंने बताया कि मेले में चिकित्सा व्यवस्था मजबूत होने पर भी रेफरल प्रक्रिया की कमजोरी उजागर हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दी के मौसम में हाइपोथर्मिया रोकने हेतु गर्माहट व आईसीयू जरूरी थे।
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