मिर्जापुर जिले में सरकारी गौशालाओं से गौवंश की तस्करी का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। लालगंज ब्लॉक के सोनवर्षा गांव स्थित एक सरकारी गौशाला से जुड़े इस प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि अब यह एक राजनीतिक विवाद का रूप भी ले चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले की सभी सरकारी गौशालाओं में निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। जिले में संचालित कुल 49 सरकारी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक 37 गौशालाओं में कैमरे लगाए जा चुके हैं, जबकि शेष में कार्य तेजी से जारी है। प्रत्येक गौशाला में न्यूनतम पांच सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। ये कैमरे गौशाला के प्रवेश मार्ग, चारदीवारी के भीतर पूरे परिसर, पशुओं के आवास स्थल और चारा भंडारण क्षेत्र में लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय से की जा सकेगी। इससे गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या तस्करी की आशंका पर समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी। जिले में कुल 18,009 गोवंश संरक्षित हैं, जिनमें से 2,222 की बीमारी के कारण मौत हुई है। सोनवर्षा गांव के ग्राम प्रधान श्याम बहादुर पटेल की गिरफ्तारी के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया है। ग्राम प्रधान की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को अपना दल (कमेरावादी) ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्टी के पदाधिकारियों ने एडीजी पीयूष मोर्डिया से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। उनका आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते उनके जिलाध्यक्ष (जो ग्राम प्रधान भी हैं) को झूठे मामले में फंसाया गया है और सत्ता पक्ष के एक कैबिनेट मंत्री के दबाव में उन्हें जेल भेजा गया है।
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