भारत सरकार ने हालिया बजट में कंटेंट क्रिएटर्स लैब स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में ये लैब बनेंगी, जहां छात्र एनिमेशन, वीएफएक्स (विजुअल इफेक्ट्स) और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेंगे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ धनंजय चोपड़ा ने बताया कि इसका उद्देश्य युवाओं को बेहतर कंटेंट रेडी और प्रस्तुत करने के लिए तैयार करना है ताकि वे रोजगार के नए अवसर हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल नए जमाने की तकनीकों से युवाओं को लैस करने पर केंद्रित है। जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, चिप कम्युनिकेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी जैसी उन्नत तकनीकों का दौर चल रहा है। आज हर बच्चे के पास स्मार्टफोन है और यदि वे अपनी क्रिएटिविटी को इन तकनीकों से जोड़ दें, तो वे प्रोफेशनल क्रिएटिव कंटेंट क्रिएटर्स बन सकते हैं। मानव की सोच, भाषा, स्टोरीटेलिंग और तकनीक का यह संगम बेहतरीन कंटेंट पैदा करेगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहले से वेब मीडिया प्रोडक्शन और एनिमेशन में छात्रों को प्रशिक्षित कर रहा है। अब यहां गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स पर जोर बढ़ेगा ताकि छात्र इन्हें व्यापक रूप से उपयोग कर सकें।समय माइक्रो-ड्रामा और माइक्रो-कंटेंट का है, जहां कम समय में प्रभावी संदेश देना जरूरी है। स्कूल स्तर से ही इसकी शुरुआत करने से छात्रों की क्रिएटिव एनर्जी सकारात्मक दिशा में चैनलाइज होगी। मोबाइल से लैस स्कूली बच्चे कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में कूद पड़ेंगे। जिससे उभरते बाजार में उनकी मजबूत उपस्थिति बनेगी। यह कदम न केवल रोजगार सृजित करेगा। बल्कि भारत को वैश्विक कंटेंट हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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