भगवान श्रीकृष्ण की जन्म एवं लीला स्थली ब्रजभूमि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ अब विदेशी प्रवासी पक्षियों को भी आकर्षित कर रही है। जोधपुर झाल, गोकुल, वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पहुंचे प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां अब ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई हैं।पिछले कुछ वर्षों में मथुरा के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का आगमन तेजी से बढ़ा है। इनमें फरह के निकट उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित, विश्व स्तर पर पहचान बना रहा जोधपुर झाल वेटलैंड प्रमुख है। इसके अतिरिक्त गोकुल बैराज तथा वृंदावन क्षेत्र में यमुना नदी पर भी प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या देखी जा सकती है। बीआरडीएस संस्था के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के.पी. सिंह के अनुसार श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र में विभिन्न विशेषताओं वाले वेटलैंड विकसित हो चुके हैं। इन स्थलों पर प्रवासी पक्षियों की अनेक प्रजातियों की मौजूदगी नियमित रूप से दर्ज की जा रही है। गोकुल बैराज से पहले यमुना नदी के पुराने बहाव से निकली एक शाखा अब वेटलैंड का स्वरूप ले चुकी है। यह नदीय वेटलैंड ऑक्सबो (Oxbow) प्रकार का है, जो मुख्य नदी प्रवाह से कटकर बना है। इसमें टाइफा घास सहित विभिन्न जलीय वनस्पतियां मौजूद हैं, जो जलीय पक्षियों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराती हैं। यहां बड़े आकार के टापू और दलदली क्षेत्र हैं, जो छोटे कीटभक्षी जलीय पक्षियों एवं पैसराइन पक्षियों के लिए अनुकूल हैं। इस क्षेत्र में जलीय एवं स्थलीय दोनों प्रकार की प्रवासी पक्षी प्रजातियां पाई गई हैं।
प्रमुख प्रजातियों में ब्लूथ्रोट, कॉमन कूट, सिट्रिन वैगटेल, व्हाइट वैगटेल, लॉन्ग-टेल्ड श्राइक, हम्स वार्बलर, बार-हेडेड गूज, रूडी शेल्डक, कॉटन पिग्मी गूज, कॉमन सैंडपाइपर, वेस्टर्न मार्श हैरियर, पाइड एवोसेट, स्पूनबिल, ग्रेट कॉर्मोरेंट, रिवर टर्न, फिजेंट-टेल्ड जैकाना, कॉमन ग्रीन शैंक, ग्रीन सैंडपाइपर आदि शामिल हैं। वृंदावन : केसी घाट से देवराहा बाबा घाट के बीच कुंभ स्थल क्षेत्र यह यमुना नदी का जलमग्न क्षेत्र है, जहां मछलियों की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है। नदी के तटीय क्षेत्र दलदली हैं, जिनमें कीड़े-मकोड़ों की भरपूर उपस्थिति है। नदी के मध्य एक-दो स्थानों पर छोटे आकार के द्वीप (आइलैंड) भी उभरे हुए हैं। यहां मछलीभक्षी और कीटभक्षी प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां दर्ज की गई हैं। प्रमुख रूप से ब्राउन-हेडेड गल, ब्लैक-हेडेड गल, पलाश गल, इंडियन रिवर टर्न, कॉमन टर्न, पेंटेड स्टॉर्क, यूरेशियन स्पूनबिल, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील, कॉमन सैंडपाइपर, बुड सैंडपाइपर, रिवर लैपविंग, इंडियन थिक-नी जैसी प्रजातियां पाई गई हैं। फरह के निकट प्रख्यात हो रहा जोधपुर झाल वेटलैंड यह एक मार्श वेटलैंड है, जिसमें विभिन्न जल-स्तरों वाले जलनिकाय मौजूद हैं। इसे उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित किया गया है। यहां घासयुक्त आवास, दलदली क्षेत्र, जलीय वनस्पतियां तथा जलनिकायों में भरपूर मछली उपलब्ध है। यह वेटलैंड जलीय पक्षीवर्ग एवं पैसराइन पक्षियों के लिए आदर्श आवास माना जाता है। यहां 60 से अधिक प्रवासी पक्षी प्रजातियां रिकॉर्ड की गई हैं। प्रमुख प्रजातियों में बार-हेडेड गूज, ग्रे-लैग गूज, रूडी शेल्डक, कॉमन पोचार्ड, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, टफ्टेड डक, गेडवाल, कॉमन टील, नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, गार्गेनी, पाइड एवोसेट, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, लिटिल स्टिंट, टेमिन्क्स स्टिंट, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, केंटिश प्लोवर, ब्लूथ्रोट, राइनेक, ब्राउन श्राइक, शॉर्ट-ईयर्ड आउल, लॉन्ग-टेल्ड श्राइक, इसाबेलिन श्राइक, ग्रे-हेडेड लैपविंग, वेस्टर्न मार्श हैरियर, ग्रेट कॉर्मोरेंट, फिजेंट-टेल्ड जैकाना, नॉब-बिल्ड डक, ग्रीन शैंक, कॉमन रेड-शैंक, स्पॉटेड रेड-शैंक आदि शामिल हैं। जोधपुर झाल में मिले 1493 जलीय पक्षी आगरा-मथुरा की सीमा पर स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड में एशियन वाटरबर्ड सेंसस-2026 के अंतर्गत जलीय पक्षियों की गणना की गई। लगातार छठे वर्ष की गई इस गणना में इस बार सर्वाधिक 72 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल हैं। कुल 72 प्रजातियों में से 32 प्रवासी और 40 स्थानीय प्रजातियां पाई गईं। यह वेटलैंड लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
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