लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी प्रेक्षागृह में ‘रंग’ की द्वितीय अभिनय कार्यशाला के तहत नाटक ‘खोल’ का मंचन किया गया। वरिष्ठ कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने स्त्री मन के भीतर छिपे दर्द, संघर्ष और उम्मीद की कहानी को सशक्त ढंग से दर्शाया। लेखिका ज्योत्सना सिंह और निर्देशक अम्बरीश बॉबी के संयोजन से यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए गहरी और संवेदनशील बन गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुमोना एस.पांडेय थीं, जबकि आकाशवाणी, लखनऊ ने इसमें सहयोग किया। नाटक ‘खोल’ समाज की उस वास्तविकता को उजागर करता है, जहां आधुनिकता के दावों के बावजूद महिलाएं अपने दुख-दर्द को छिपाने पर विवश हैं। इसमें दर्शाया गया कि कैसे घरेलू महिलाओं को जिम्मेदारियां तो दी गईं, लेकिन उनके निर्णयों और अधिकारों पर पुरुष का वर्चस्व बना रहा। शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्हें सीमाओं में बांधा गया। यह नाटक स्त्री मन के अकेलेपन, त्याग और मौन पीड़ा की परतों को धीरे-धीरे खोलता है। कार्यशाला के माध्यम से कलाकारों ने अपने अनुभवों को अभिनय में ढालकर दर्शकों को प्रभावित किया इस नाटक की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि इसमें मंच पर प्रदर्शन करने वाली सभी महिलाएं वरिष्ठ नागरिक थीं। इन महिलाओं ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा परिवार और समाज को समर्पित किया है। अभिनय कार्यशाला के माध्यम से पहली बार रंगमंच से जुड़ी इन कलाकारों ने अपने अनुभवों को अभिनय में ढालकर दर्शकों को प्रभावित किया। प्रस्तुति में हास्य और दर्द दोनों के क्षण थे, जो यह दर्शाते हैं कि उम्र कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए कोई बाधा नहीं है। निर्देशक अम्बरीश बॉबी ने बताया कि ‘खोल’ उन बंद दरवाजों को खोलने का एक प्रयास है, जिनके पीछे वर्षों के दबे हुए सच छिपे हैं। नाटक में विभा चंद्र ने कुंती, ज्योत्सना सिंह ने मालती सिंह, अलका कुदेसिया ने जीना, सुषमा चंद्रा ने ललिता, स्मृति सरन ने रिद्धिमा, रेखा कुमार ने ब्रह्मचारिणी और रवि राजवंशी ने बंटी की भूमिका निभाई। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और प्रस्तुति को यादगार बताया।
https://ift.tt/ZMdX5bV
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply