विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर सोमवार को हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण की भीकुंड वेटलैंड में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण और जन-जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की महत्ता को लेकर लोगों को जागरूक करना रहा। वॉच टावर से बर्ड वॉचिंग की शुरुआत हुई, जहां विशेषज्ञों ने पक्षियों की पहचान और उनके प्राकृतिक आवास की जानकारी दी।अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा बर्ड काउंट दर्ज किया गया, जिसमें 30 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी देखे गए। यह क्षेत्र 300 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों का आवास है, जिनमें बार हेडेड गूस, सरस क्रेन, किंगफिशर और स्पून बिल्ड डक प्रमुख रहीं। कार्यक्रम के दूसरे चरण में मखदुमपुर घाट स्थित टर्टल हैचरी से 1633 कछुआ शावकों को गंगा नदी में छोड़ा गया। अधिकारियों ने बताया कि कछुए नदी के जैव संतुलन और स्वच्छता में अहम भूमिका निभाते हैं।
वेटलैंड दिवस पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की मिशिका त्यागी और हस्तिनापुर पब्लिक स्कूल के रित्विक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बर्ड फोटोग्राफी और संरक्षण में योगदान के लिए डॉ. रजत भार्गव को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने कहा कि आर्द्रभूमियां प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। कार्यक्रम वन विभाग, डब्लूडब्लूएफ और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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