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हिंदू-सम्मेलन में महामंडलेश्वर कृष्णानंद ने कहा-शंकराचार्य का विरोध करता हूं:योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी को बताया ‘संत की नहीं, आतंकवादी भाषा’

कासगंज के प्रभुपार्क मैदान में सोमवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में मथुरा से आए महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने ‘एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’ का नारा देते हुए हिंदू समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज ने कहा कि पूरे देश में हिंदुओं को संगठित करने के उद्देश्य से इस तरह के सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से जाति के नाम पर समाज को बांटने की साजिशों के प्रति सतर्क रहने की अपील की और कहा कि एकजुटता से ही समाज को शक्ति मिलती है। माघ मेले की घटना और शंकराचार्य पर टिप्पणी कृष्णानंद महाराज ने माघ मेले में शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संत का सम्मान होना चाहिए, चाहे वह किसी भी मत का हो। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और उनके गुरु द्वारा न तो उनका अभिषेक किया गया था और न ही किसी प्रकार की वसीयत लिखी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से कोई चूक हुई है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ के समर्थन में बयान महामंडलेश्वर कृष्णानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया। उन्होंने शंकराचार्य द्वारा योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी संत की नहीं हो सकती। उन्होंने इसे ‘आतंकवादी और उद्दंड भाषा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र में मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार न होती, तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं हो पाता और सदियों पुराना कलंक समाप्त नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ ने हमेशा हिंदू समाज के हित में कार्य किया है। हिंदू राष्ट्र को लेकर मांग महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज ने केंद्र सरकार से भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग करते हुए चार बिंदु रखे। इनमें गाय को राष्ट्र माता, हिंदी को राष्ट्र भाषा, भगवद गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ और सनातन धर्म को राष्ट्रीय धर्म घोषित करने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के हिंदू होने पर कोई संदेह नहीं है, जबकि शंकराचार्य के संदर्भ में उठ रहे सवालों को लेकर उन्होंने अपनी असहमति जताई।


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