अलीगढ़ के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो (कोर्ट संख्या-02) प्रदीप कुमार राम की अदालत ने सोमवार को 9 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी जितेंद्र प्रसाद को 10 वर्षीय मासूम के साथ दरिंदगी का दोषी करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। हालांकि जैसे ही कोर्ट ने उसे दोषी ठहराया और जमानत निरस्त की, आरोपी कोर्ट से फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। ये था मामला घटना 4 अगस्त 2017 की है। थाना जवां क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले जितेंद्र प्रसाद पुत्र बद्री प्रसाद ने पड़ोस में रहने वाली 10 साल की बच्ची को खेलने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने चाचा के निर्माणाधीन मकान में बुलाया था। वहां उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की चीख सुनकर जब उसके माता-पिता और भाई मौके पर पहुंचे तो आरोपी उन्हें देखकर भाग निकला। गंभीर हालत में बच्ची को थाने ले जाया गया, जहां एफआईआर दर्ज हुई। कोर्ट में साक्ष्यों ने खोली पोल मुकदमे के दौरान विशेष लोक अभियोजक लव बंसल और संजय शर्मा ने पैरवी की। पीड़िता ने अदालत में बयान दर्ज कराए और आरोपी की पहचान की। मेडिकल रिपोर्ट में भी डॉक्टर उजमा खान ने पुष्टि की थी कि पीड़िता के साथ गंभीर चोटें और जबरदस्ती की गई थी। स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार घटना के समय पीड़िता की उम्र महज 9 साल 4 माह थी। न्यायिक अभिरक्षा में लेने के दिए थे आदेश सोमवार को न्यायाधीश प्रदीप कुमार राम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर जितेंद्र प्रसाद को धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि अभियुक्त को तुरंत न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाए ताकि सजा के प्रश्न पर सुनवाई की जा सके। पहले भी न्यायालय से भागा था एडीजीसी पॉस्को संजय शर्मा ने बताया कि पहले यह मुकदमा पॉक्सो न्यायालय प्रथम में चल रहा था। करीब एक महीने पहले भी अदालत ने फैसला सुनाने की तैयारी की तो आरोपी को पता चल गया। इस दौरान वह न्यायालय के बाहर बैठा था और वहां से फरार हो गया। बाद में वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ा था। अब यह मुकदमा पॉस्को न्यायालय द्वितीय में चल रहा है। कस्टडी में लेने की सुनते ही भागा विशेष लोक अभियोजक लव बंसल ने बताया कि 9 साल पहले जितेंद्र ने बालिका के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल भेजा गया था और मेडिकल आदि साक्ष्यों ने घटना की गवाही दी। जितेंद्र को सोमवार को दोषी करार दिया गया था, लेकिन जैसे ही उसने कस्टडी में लेने की बात सुनी वह कोर्ट से भाग गया। पुलिस उसकी तलाश में लगी है। अब सजा का फैसला आरोपी की गिरफ्तारी के बाद होगा।
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