बलरामपुर में विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर पचपेड़वा विकासखंड के इमलिया कोडर में एक वृहद जागरूकता और शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।बलरामपुर फर्स्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण,पारंपरिक ज्ञान और युवाओं का शैक्षणिक सशक्तिकरण था।इस कार्यक्रम में थारू जनजाति के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतियोगी विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय,बलरामपुर के कुलपति प्रो.रवि शंकर सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आर्द्रभूमियां प्रकृति की जीवनदायिनी प्रणाली हैं।ये जल संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हैं। प्रो.सिंह ने जोर दिया कि थारू समाज का पारंपरिक ज्ञान आज भी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आर्द्रभूमियों के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि ये वर्षा जल को संचित कर भूजल स्तर बनाए रखने,बाढ़ नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने और वन्यजीवों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। इमलिया कोडर क्षेत्र की आर्द्रभूमि को स्थानीय पारिस्थितिकी,कृषि और जनजीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।वक्ताओं ने इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर बलरामपुर फर्स्ट द्वारा जनपद के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित 22 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।थारू जनजाति के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को अध्ययन सामग्री से युक्त बैग और प्रतियोगी परीक्षा किट वितरित की गईं,ताकि वे अपनी तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें। प्रतियोगी छात्र-छात्राओं ने नाटक,काव्य पाठ और भाषण के माध्यम से आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का संदेश दिया। राणा प्रताप विद्यालय के प्रधानाचार्य आशुतोष जी ने कहा कि विद्यालयों और सामाजिक संगठनों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा को जोड़ना होगा।प्रधानाचार्य ने आगे कहा कि जब छात्र प्रकृति से जुड़ते हैं,तभी उनमें जिम्मेदार नागरिक बनने का भाव विकसित होता है। बलरामपुर फर्स्ट के सर्वेश सिंह ने बताया कि आर्द्रभूमि संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं है,बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ है।उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं को संसाधन और मार्गदर्शन देकर मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
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