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गुरु रविदास की चरण रज लेकर लौटने लगी संगत:दान में आए डॉलर,सोना-चांदी; डिस्पेंसरी के लिए मिले 2 करोड़,24 घंटे में 3 लाख ने किया दर्शन

संत शिरोमणि गुरु रविदास के 649वें प्राकट्योत्सव के भव्य आयोजन के समापन के बाद सोमवार से श्रद्धालुओं की घर वापसी शुरू हो गई। सोमवार दोपहर को मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी, संतों और श्रद्धालुओं को लेकर एक विशेष ट्रेन जालंधर (पंजाब) के लिए रवाना हुई। संत रविदास की प्रतिमा को नमन कर अगली जयंती में पुनः आने का भावुक संदेश देते हुए संत मनदीप दास ट्रस्ट से जुड़े लोगों के साथ जालंधर के लिए प्रस्थान किए। स्पेशल ट्रेन से जाने वाली संगत के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से यात्रा के दौरान सूखा भोजन उपलब्ध कराया गया। जयंती के समापन के बाद सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला चलता रहा। पंडाल, तंबू और यात्री निवास धीरे-धीरे खाली होने लगे। संगत ट्रेन के साथ-साथ बसों और निजी वाहनों से भी अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुई। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गुरु के दर से खरीदी गई धार्मिक वस्तुएं और प्रसाद अपने साथ ले जाकर स्मृतियां संजोईं। विशाल लंगर सेवा मंगलवार से बंद कर दी जाएगी, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पीएसी और पुलिस बल की तैनाती अभी जारी है। 24 घंटे हुए दर्शन रविवार को प्राकट्योत्सव के अवसर पर सीर गोवर्धनपुर का पूरा क्षेत्र मानो ‘बेगमपुरा’ में परिवर्तित हो गया। संगत ने गुरु के ध्यान में लीन होकर उनके चरणों की रज माथे पर लगाई और स्वयं को धन्य महसूस किया। संत रविदास मंदिर के दोनों ओर लगभग दो किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं, जहां दर्शन के लिए एक से दो घंटे तक का समय लग रहा था। लगातार 24 घंटे तक गुरु के दर्शन होते रहे। 15 देश 25 राज्यों से पहुंचे 3 लाख श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में 15 देशों और 25 राज्यों से आए तीन लाख से अधिक रैदासियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मेला क्षेत्र में गुरुवाणी की गूंज सुनाई देती रही। शहर, ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों से गाजे-बाजे के साथ निकली झांकियां देर रात तक मंदिर पहुंचती रहीं। डीजे की धुन पर थिरकते श्रद्धालुओं से पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। प्रातःकाल संत मनदीप दास की अगुवाई में 150 फीट ऊंचा निशान फहराकर प्राकट्योत्सव का शुभारंभ किया गया। अखंड अमृतवाणी के पाठ के समापन और अरदास के बाद शब्द कीर्तन शुरू हुआ। हालांकि संगत ने शनिवार रात 12 बजे ही मंदिर परिसर में केक काटकर प्राकट्योत्सव की शुरुआत कर दी थी। मंदिर पूरी रात खुला रहा और रविवार रात तक दर्शन का क्रम निर्बाध चलता रहा। महिलाएं और पुरुष अनुशासनबद्ध कतारों में दर्शन करते रहे, जबकि मेला क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरा रहा। दान में आए डॉलर, सोना-चांदी; डिस्पेंसरी को मिले 2 करोड़ रुपये देश-विदेश से आए रैदासियों ने मंदिर में रुपये के साथ-साथ सोना, चांदी और डॉलर भी दान किए। दान काउंटरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। प्रवासी भारतीयों ने विशेष रूप से विदेशी मुद्रा और स्वर्ण आभूषणों का दान किया। स्वर्ण बंगड़ की ओर से स्व. बीबी रेशम कौर बंगड़ चैरिटेबल डिस्पेंसरी के संचालन हेतु 2 करोड़ रुपये का दान दिया गया, जिसे सेवा कार्यों के लिए अहम माना जा रहा है। इन वीआईपी ने किए दर्शन मंदिर में दर्शन के लिए वीआईपी भी पहुंचे थे। यूपी सरकार के मंत्री असीम अरुण, पंजाब सरकार के मंत्री रविजोत सिंह, नगीना के सांसद चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री तेलंगाना कोंद्रा पुष्पोलीला, पूर्व सांसद शमशेर सिंह दुल्लो आदि मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।


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