भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबला हमेशा से ही रोमांच और चर्चा का विषय रहा है। लेकिन इस बार पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी द्वारा भारत के साथ मैच न खेलने के फैसले ने एक बार फिर सियासत और खेल को आमने-सामने ला खड़ा किया है। पीसीबी के इस फैसले को लेकर कानपुर के युवाओं में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली है। शहर के कई युवाओं ने इसे पाकिस्तान की कमजोरी और डर बताया है।
कानपुर के रहने वाले रवेंद्र सिंह, अभय प्रताप सिंह और मानवेंद्र प्रताप सिंह ने खुलकर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि पाकिस्तान की टीम भारत से डरती है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से हर बड़े टूर्नामेंट और ट्रॉफी में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी है। ऐसे में पाकिस्तान की टीम जानती है कि मैदान पर वह भारतीय टीम के सामने टिक नहीं पाएगी। इसी डर के चलते वह मुकाबले से पीछे हट गई।
रवेंद्र सिंह ने कहा कि बाप तो बाप होता है। पाकिस्तान को यह बात मान लेनी चाहिए कि क्रिकेट के मैदान में भारत उनसे कहीं आगे है। जैसे देश की सुरक्षा में हमारी सेना पाकिस्तान की सेना को मुंहतोड़ जवाब देती है, वैसे ही क्रिकेट में भी भारतीय टीम पाकिस्तान को उसकी जगह दिखा देती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मैच होता, तो एक बार फिर पाकिस्तान की सच्चाई दुनिया के सामने आ जाती।
अभय प्रताप सिंह और मानवेंद्र प्रताप सिंह का भी यही मानना है कि पीसीबी का फैसला खेल भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि जब कोई टीम हार के डर से खेलने से मना कर दे, तो यह उसकी मानसिक हार मानी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत से मुकाबला न करना पाकिस्तान की कमजोरी को साफ दिखाता है। वहीं दूसरी ओर, कानपुर की सुहानी सिंह ने इस पूरे मामले को थोड़े अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि खेल को खेल की तरह ही देखना चाहिए। सुहानी का मानना है कि क्रिकेट में राजनीति नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा जो किया जा रहा है, वह गलत है। लेकिन उनके न खेलने से भारतीय टीम को कोई नुकसान नहीं होने वाला। भारत की टीम अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर आगे बढ़ेगी।
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