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कानपुर में ऑटो चालकों ने चक्का जाम किया:बोले- प्रशासन के नियम व्यवहारिक नहीं, रोज नियम बदले जाने से दिक्कत हो रही

कानपुर महानगर में ऑटो रिक्शा और ई-ऑटो चालकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। प्रशासन द्वारा लगातार नए-नए नियम लागू किए जाने से नाराज चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया और अपनी परेशानियां सामने रखीं। चालकों का कहना है कि जिस तरह से रोज नियम बदले जा रहे हैं, उससे उनका कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है।
कानपुर के अलग-अलग इलाकों से आए ऑटो चालकों ने बताया कि कभी रूट को लेकर सख्ती की जाती है, कभी तय दूरी में ही वाहन चलाने की बाध्यता लगाई जाती है और कभी भारी चालान का डर दिखाया जाता है। इन सब नियमों के कारण यात्रियों को छोड़ना-लाना कठिन हो गया है। कई बार तो यात्री ज्यादा दूरी के लिए जाने को कहते हैं, लेकिन नियमों के डर से चालक मना कर देते हैं, जिससे उनकी आमदनी सीधे तौर पर घट रही है। ऑटो चालक राहुल का कहना है,कि वे कोई शौक के लिए ऑटो नहीं चला रहे हैं, बल्कि यही उनकी रोजी-रोटी का साधन है। दिनभर सड़क पर मेहनत करने के बाद जो थोड़ी-बहुत कमाई होती है, उसी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज चलता है। अगर इसी तरह नियमों का बोझ बढ़ता रहा तो उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति खड़ी हो सकती है। कुछ चालकों ने गुस्से में यह तक कहा कि हालात ऐसे बने तो वह दिन दूर नहीं जब मजबूरी में उन्हें अपने ऑटो खड़े या जला देने जैसी बातें सोचनी पड़ेंगी। प्रदर्शन कर रहे चालक अर्चित ने आरोप लगाया कि, प्रशासन नियम तो बना देता है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं समझता। सड़कें पहले से जाम रहती हैं, पार्किंग की व्यवस्था ठीक नहीं है और ऊपर से ऑटो चालकों पर ही सारा दबाव डाल दिया जाता है। उनका कहना है कि बड़े वाहनों और निजी गाड़ियों पर उतनी सख्ती नहीं दिखती, जितनी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों पर की जाती है। ऑटो चालक दिनेश ने बताया कि, हम सभी लोगों ने प्रशासन से मांग की है, कि नियम बनाने से पहले चालकों से बातचीत की जाए। अगर यातायात व्यवस्था सुधारनी है तो उसके लिए व्यावहारिक समाधान निकाले जाएं, न कि ऐसे नियम थोपे जाएं जिनसे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग ही सबसे ज्यादा प्रभावित हों। चालकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा, यहां तक कि हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।

वहीं, आम यात्रियों का कहना है,कि ऑटो शहर की जरूरत हैं। अगर ऑटो नहीं चलेंगे तो रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन और ऑटो चालकों के बीच बातचीत हो और ऐसा समाधान निकले, जिससे नियम भी मानें जाएं और चालकों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहे.


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