मिर्जापुर में संस्कार भारती और भारतीय संगीत कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में नाट्यशास्त्र के आचार्य महर्षि भरत मुनि की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर साहित्य, संगीत एवं नाट्य कला से जुड़े अनेक कलाकारों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ काशी प्रांत अध्यक्ष डॉ. गणेश प्रसाद अवस्थी और कमला पी.जी. कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रितु सिंह ने दीप प्रज्वलित कर तथा भरत मुनि के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। प्रारंभ में संस्कार भारती के ध्येय गीत का सामूहिक गायन हुआ। अपने संबोधन में डॉ. गणेश प्रसाद अवस्थी ने संस्कार भारती के ध्येय पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. रितु सिंह ने बताया कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व रचित ‘नाट्यशास्त्र’ विश्व का प्राचीनतम और सर्वाधिक व्यापक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की आधारशिला है। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। प्रदीप कुमार ने गणेश वंदना और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम संयोजक बैकुंठ नाथ केसरवानी ने ‘पायलिया झंकार मेरी’ बंदिश प्रस्तुत की। अशोक जायसवाल ने भजन ‘जब भी सताए गम तो शिव का नाम लीजिए’ गाया। प्रभाकर त्रिपाठी ने भजन ‘हम तुम्हारे हैं प्रभु जी’ प्रस्तुत किया। शंकर सोनी ने होली गीत ‘रंग डालूंगी’ और त्रिभुवन नाथ उपाध्याय ने गजल ‘चले गए दिल के दामनगीर’ प्रस्तुत की। समापन सत्र में केंद्राध्यक्ष द्वारिका नाथ अग्रहरि ने भजन ‘जन्म तेरा बातों ही बात बीत गए’ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आशुतोष सोनी ने की, जबकि संचालन संस्कार भारती के महामंत्री शिवराम शर्मा ने किया। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर रेखा गौड़, शैला श्रीवास्तव, राजकुमार पाहवा, विष्णु नारायण मालवीय, अरविंद अवस्थी, अनिल यादव, शिवलाल गुप्ता, सुरेश मौर्य, संतोष तिवारी, संदीप श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
https://ift.tt/bdNAsjJ
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply