वाराणसी के डीएवी पीजी कालेज में आयोजित आरएसएस शताब्दी वर्ष की राष्ट्रीय संगोष्ठी में संघ के कई पदाधिकारी भी पहुंचे हैं। इन्ही में से एक आरएसएस की अनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक और संघ बड़े नेता जे नंद कुमार ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बिना नाम लिए बड़ा हमला किया। उन्होंने कहा- अपने स्वार्थ के लक्ष्य को मन में रखकर किसी भी समाज या देश में कोई काम नहीं करना चाहिए। स्वार्थी बनने पर कोई भी हो चाहे शंकराचार्य ही क्यों न हो। तिरस्कृत हो जाएंगे। अपने स्वार्थ के लिए कोई काम नहीं करना चाहिए RSS के जे नंद कुमार ने कहा – अपने स्वार्थ और पोलिटिकल स्वार्थ के लिए सत्ता के प्रति और व्यवस्थाओं के विरुद्ध कार्य करना गलत है। चाहे जो भी हो चाहे सन्यासी हो, शंकराचार्य या कोई भी हो। वह गलत है। जिसने भी आरोप लगाया उन्हें अब समाज भी समझ गया है कि उनका लक्ष्य क्या था। इस तरह का आरोप लगाने वाले को समाज इसको समझता है। कुछ लोग डिस्परेट एलिमेंट्स है जो हताश होकर इस तरह की बात करते हैं।उनपर ध्यान देने के लिए समज भी तैयार नहीं है। ऐसे लोग आगे चलकर तिरस्कृत हो जाएंगे। जो शब्द निकल गए अब वापस नहीं आ सकते डीएवी की इसी संगोष्ठी में पहुंचे साउथ एशिया यूनिवर्सिटी, न्यू दिल्ली के प्रसिडेंट प्रोफेसर केके अग्रवाल ने शंकराचार्य के मामले पर कहा – अब इस मामले का हल बातचीत से ही होना है। क्योंकि जो शब्द एक बार मुंह से निकल गए वो वापस नहीं जाएंगे। बातचीत के माध्यम से ही उसे अब सुधारा जाएगा। बातचीत से कोई ऐसा मुद्दा नहीं ही जो सुलझाया न जा सके। उन्होंने कहा कोई भी चीज जो किसी को हर्ट करे वो ठीक नहीं। उन्होंने आगे कहा – शंकराचार्य तो इस देश के सबसे बुद्धिमान पुरुषों में मानें जाते हैं। मेरा मानना है कि किसी को भी गलती हो, लेकिन यदि किसी ने किसी को हर्ट किया है तो वह जानबूझकर नहीं किया होगा। कुछ अकस्मात् हुआ होगा। तो उसे डायलॉग के माध्यम से सुधारा जा सकता है।
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